जोरहाट : असम के जोरहाट में शनिवार तड़के महालया के अवसर पर हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। गर अली इलाके में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। इस मौके पर लोगों ने पारंपरिक आयोजन में हिस्सा लेकर मां दुर्गा के आगमन का स्वागत किया। हिंदू धर्म में महालया को पितृ पक्ष की समाप्ति और देवी पक्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। जोरहाट में हर साल इस अवसर पर लोग तड़के सुबह सड़कों पर जुटते हैं। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है।
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तराजन पूजा सम्मिलनी ने मनाया शताब्दी वर्ष
इस साल महालया का आयोजन खास रहा। तराजन पूजा सम्मिलनी ने अपनी स्थापना और परंपरा के 100 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया। इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के लिए आयोजकों ने पिछले वर्षों की तुलना में अधिक भव्य कार्यक्रम आयोजित किए। तराजन पूजा सम्मिलनी के अध्यक्ष भूपेन बरुआ ने कहा कि जोरहाट में यह परंपरा लगभग 100 वर्षों से चली आ रही है। इस वर्ष सम्मिलनी ने अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश की महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
मंदिर से निकाला गया जुलूस
भूपेन बरुआ ने बताया, “इस ऐतिहासिक अवसर को खास बनाने के लिए हमने इस बार महालया का आयोजन पिछले वर्षों की तुलना में अधिक भव्य तरीके से करने का प्रयास किया है। हमने अपने मंदिर से जुलूस निकाला, जो यहां से लगभग 2 किलोमीटर दूर है। वहां से जुलूस निकालकर हम इस आयोजन स्थल तक पहुंचे।” आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने प्रार्थना, भजन, जुलूस और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से मां दुर्गा के आगमन का स्वागत किया।
महालया का धार्मिक महत्व
जोरहाट के स्थानीय निवासी श्री श्री घोष ने महालया के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस दिन हजारों लोगों का सड़कों पर जुटना उनकी गहरी धार्मिक आस्था को दर्शाता है। घोष के मुताबिक, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महालया के दिन मां दुर्गा कैलाश पर्वत से धरती पर आती हैं। मान्यता है कि देवी के आगमन से वातावरण पवित्र होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने बताया कि महालया का सबसे महत्वपूर्ण पहलू पितृ पक्ष की समाप्ति और देवी पक्ष की शुरुआत है। पितृ पक्ष के दौरान लोग अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। इसके समाप्त होते ही देवी पक्ष शुरू होता है, जो मां दुर्गा की आराधना और दुर्गा पूजा की तैयारियों से जुड़ा है।
दुर्गा पूजा की तैयारियां तेज
महालया को दुर्गा पूजा से पहले महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर माना जाता है। इसके साथ ही असम सहित देश के विभिन्न हिस्सों में दुर्गा पूजा की तैयारियां तेज हो जाती हैं। पूजा समितियां पंडालों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अन्य आयोजनों को अंतिम रूप देने में जुट जाती हैं। जोरहाट में हर साल होने वाला महालया आयोजन शहर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। इस बार तराजन पूजा सम्मिलनी के शताब्दी समारोह ने आयोजन को और खास बना दिया। हजारों लोगों की भागीदारी ने शहर की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक एकजुटता की झलक पेश की।




