पूजा पंडाल का असमय खुलना शास्त्रसम्मत नहीं है। हिंदू धर्मगुरु एवं प्रख्यात ज्योतिषी स्वामी दिव्यानंद जी महाराज ने एक विज्ञप्ति जारी कर पूजा आयोजकों से शास्त्रीय विधान का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पूजा पंडालों का पट महासप्तमी के दिन नवपत्रिका प्रवेश के बाद ही आम लोगों के दर्शन के लिए खोला जाना चाहिए।
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स्वामी दिव्यानंद ने कहा कि आजकल कई पूजा पंडालों को समय से पहले खोल दिया जाता है। इसके पीछे आयोजकों का अति उत्साह, भीड़ नियंत्रित करने की सोच या पूजा में अधिक से अधिक दिनों तक शामिल होने की इच्छा हो सकती है। उन्होंने कहा कि पूजा पर काफी खर्च करने के बाद अधिक दिनों तक इसका आनंद लेने की सोच भी आयोजकों के मन में हो सकती है, लेकिन इन कारणों से शास्त्रीय विधान की अनदेखी नहीं की जा सकती।
षष्ठी को होता है बेलवरण का विधान
स्वामी दिव्यानंद जी महाराज ने बताया कि षष्ठी के दिन बेलवरण किया जाता है। इस अनुष्ठान में देवी-देवताओं का आमंत्रण और अधिवास होता है। इसके बाद महासप्तमी के दिन नवपत्रिका प्रवेश की प्रक्रिया पूरी की जाती है। उन्होंने कहा कि नवपत्रिका प्रवेश के बाद ही पूजा पंडालों का पट सार्वजनिक रूप से खोला जाना चाहिए। धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा के विभिन्न अनुष्ठानों का अपना महत्व है और उनका पालन करना जरूरी है।
प्राण-प्रतिष्ठा और चक्षु दान का महत्व
स्वामी दिव्यानंद ने कहा कि धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब तक प्राण-प्रतिष्ठा और चक्षु दान का अनुष्ठान पूरा नहीं होता, तब तक मूर्ति को दर्शन योग्य नहीं माना जाता है। ऐसे में पूजा पंडालों को निर्धारित धार्मिक विधान के अनुसार ही खोलना उचित है। उन्होंने कहा कि जाने-अनजाने सनातन धर्म के नियमों का उल्लंघन करना उचित नहीं है। लोगों को अपने संस्कारों और धार्मिक परंपराओं के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
आने वाली पीढ़ी को भी दें धार्मिक परंपराओं की शिक्षा
स्वामी दिव्यानंद जी महाराज ने कहा कि अपनी धार्मिक परंपराओं और संस्कारों को समझना तथा उनका पालन करना जरूरी है। आने वाली पीढ़ी को भी इन परंपराओं के बारे में शिक्षित करना सभी का दायित्व है। उन्होंने आशा जताई कि भविष्य में पूजा-पाठ के दौरान शास्त्रीय विधान की अनदेखी नहीं की जाएगी और पूजा पंडालों को असमय खोलने से बचा जाएगा।




