रांची : आदिवासी नेत्री निशा भगत की फेसबुक लाइव के दौरान हुई मौत के मामले में केंद्रीय सरना समिति ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने आज यानी शुक्रवार को प्रेस बयान जारी कर मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। बबलू मुंडा ने कहा कि निशा भगत ने आत्महत्या से ठीक पहले फेसबुक लाइव पर आकर रोते हुए सिस्टम और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना है कि फेसबुक लाइव के दौरान निशा की बातें इस ओर इशारा करती हैं कि वह मानसिक प्रताड़ना और लाचारी से गुजर रही थीं।
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सोशल मीडिया पर मिल रही थीं धमकियां, पुलिस से लगाई थी गुहार
केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि निशा भगत को पहले से सोशल मीडिया पर धमकियां मिल रही थीं। उन्होंने साइबर थाना और पुलिस प्रशासन से भी मदद की गुहार लगाई थी। बबलू मुंडा ने कहा कि समय रहते त्वरित कार्रवाई नहीं होने के कारण एक जुझारू आदिवासी नेत्री को अपनी जान गंवानी पड़ी। उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि धमकियों से जुड़े मामलों में लापरवाही और शिकायतों को दबाने की प्रवृत्ति से अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं।
आदिवासी महिलाओं की सुरक्षा पर जताई चिंता
बबलू मुंडा ने कहा कि झारखंड में आदिवासी समाज की महिलाएं और समाज के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब समाज के हक की लड़ाई लड़ने वाली महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, तो आम महिलाओं और पिछड़े वर्ग के लोगों की सुरक्षा का क्या हाल होगा।
फेसबुक लाइव में लगाए गए आरोपों की जांच की मांग
केंद्रीय सरना समिति ने निशा भगत के फेसबुक लाइव में उठाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। समिति ने पुलिस की कथित लापरवाही की भी जांच करने और दोषियों के साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की अपील की है। बबलू मुंडा ने कहा कि इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य बेटी या सामाजिक नेत्री को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े। प्रेस विज्ञप्ति सचिव अमर मुंडा की ओर से जारी की गई है।



