धनबाद/रांची : झारखंड के धनबाद अंतर्गत वासेपुर के कुख्यात फरार गैंगस्टर प्रिंस खान के कथित पाकिस्तान कनेक्शन और अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क से जुड़ाव की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) करेगी। एनआईए की एक विशेष टीम धनबाद पहुंच चुकी है और उसने प्रिंस खान से जुड़े आपराधिक व संदिग्ध आतंकी नेटवर्क के साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। केंद्रीय जांच एजेंसी मुख्य रूप से प्रिंस खान के विदेशी संपर्कों, पाकिस्तान में मौजूद ठिकाने और व्यापारियों से वसूली गई रंगदारी की रकम के अंतरराष्ट्रीय प्रवाह (फंडिंग) की गहराई से पड़ताल कर रही है।
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क्या केवल रंगदारी या जैश-ए-मोहम्मद से भी हैं तार?
एनआईए की जांच के केंद्र में मुख्य सवाल यह है कि क्या प्रिंस खान का गिरोह केवल संगठित अपराध और रंगदारी तक ही सीमित है या इसके तार प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और पाकिस्तान स्थित अन्य संदिग्ध नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। हाल ही में धनबाद पुलिस की पूछताछ के दौरान प्रिंस खान के करीबी सैफ अब्बास नकवी उर्फ सैफी उर्फ मेजर ने उसके पाकिस्तान में छिपे होने और वहां कथित आतंकी संपर्कों को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
दुबई के अल अंसारी एक्सचेंज और हवाला से फंडिंग का दावा
पुलिस जांच में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड के व्यापारियों, कोयला कारोबारियों और उद्योगपतियों से वसूली गई रंगदारी की बड़ी रकम कथित तौर पर हवाला नेटवर्क और दुबई के अल अंसारी एक्सचेंज के जरिए पाकिस्तान भेजी जाती थी। जांच एजेंसियों को इस नेटवर्क में प्रयुक्त विभिन्न बैंक खातों और लेन-देन से जुड़ी कई डिजिटल पर्चियां मिली हैं। एनआईए अब इन सभी वित्तीय लेन-देन (Financial Trail) की कड़ियों की विस्तृत जांच करेगी। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या रंगदारी की रकम का कोई हिस्सा आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण में इस्तेमाल हुआ है।
तौकीर बलोच, ISI और जैश से संपर्क की आशंका
जांच में यह बिंदु भी अत्यंत महत्वपूर्ण है कि प्रिंस खान भारत से फरार होकर पाकिस्तान कैसे पहुंचा और वहां उसे किसने शरण व मदद दी। खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रिंस खान एक पाकिस्तानी नागरिक तौकीर बलोच के माध्यम से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) और जैश-ए-मोहम्मद के संपर्क में आया था। एनआईए इन सभी सूचनाओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने के लिए उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों और कॉल रिकॉर्ड्स की गहन जांच कर रही है। लंबे समय से झारखंड पुलिस के लिए सिरदर्द बना प्रिंस खान अगर आतंकी गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ आतंकवाद निरोधी कठोर कानूनों (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज कर शिकंजा कसा जाएगा।




