परिमल नथवाणी ने अपने वक्तव्य में कहा है कि करीब 6 सालों के अंतराल के बाद बड़ाम-जराटोली, पतरातू और चुट्टु आदर्श ग्रामों की सुविधाओं और रांची नगर में निर्मित कुछ सुविधाओं के बारे में प्रथमदर्शी रिपोर्ट अपने व्यक्तिगत स्रोतों से प्राप्त की. इसका उद्देश्य इन सुविधाओं का उचित उपयोग हो रहा है या नहीं, ये देखना था.
उन्होंने कहा रांची के करमटोली में आदिवासी छात्रों के लिए बनवाए गए पुस्तकालय भवन का समुचित उपयोग हो रहा है और आदिवासी छात्र इससे लाभान्वित हो रहे हैं, यह संतोषजनक है. रांची स्थित महेन्द्र प्रसाद महिला महाविद्यालय में बने वर्ष खंड और अन्य सुविधाएं छात्राओं की शिक्षा में उपयोगी सिद्ध हो रही है. एक तरह से यह कार्य नारी सशक्तिकरण का भी उदाहरण है.
रांची नगर निगम के पुराने अस्पताल भवन को ध्वस्त कर के नए सिरे से जिस अस्पताल भवन का पुन:निर्माण करवाया था वह अब पूर्णतया कार्यरत है और लोगों को उचित दामों में चिकित्सा सेवा एवं दवाएं उपलब्ध हो रही है.
परिमल नथवाणी ने खुशी जताते हुए कहा है कि बड़ाम पंचायत के अंतर्गत चाव से एक भव्य लिगल क्लिनिक बनवाया था. झारखंड हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायमूर्ति डीएन पटेल ने भी इसमें विशेष रुचि लेकर मार्गदर्शन किया था. रांची जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण द्वारा इस लिगल क्लिनिक का संचालन हो रहा था. यह लिगल क्लिनिक अब भी चल रहा है. यह खुशी की बात है. लेकिन उसे अधिक सुचारु, सक्रिय एवं कार्यक्षम बनाने की जरुरत है.
सांसद ने कहा कि बड़ाम-जराटोली और चुट्टु आदि को मुख्यमार्ग से जोड़ती पक्की सड़कें अभी भी अच्छी तरह से मेनटेन हो रही है और उसमें टूट-फूट नहीं है , यह अच्छी बात है. सभी ग्रामीण सड़कें साफ-सुथरी और स्वच्छ पाई गई है. यह अच्छी बात है. गौरतलब है कि ग्रामीण सड़कें बनवाकर उन्हें मुख्य मार्ग से जोड़कर ग्रामजनों को सामाजिक और आर्थिक उत्थान की मुख्य धारा में जोड़ सकते हैं.
तात्पर्य है कि सांसद नथवाणी ने अपने झारखंड के राज्यसभा सांसद के रुप में 2008 से 2020 की दो अवधियों में सांसद निधि और कहीं कहीं व्यक्तिगत लागत से उत्कृष्ट कार्य किया और लोगों के लिए उपयोगी सुविधाओं का निर्माण करवाया.









