पटना : बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के राज्यपाल कोटे से बिहार विधान परिषद (MLC) का सदस्य मनोनीत होने के बाद उनके समर्थकों और राजनीतिक गलियारों में खुशी की लहर है। एमएलसी पद के रूप में विधान परिषद की सदस्यता मिलने के साथ ही उनका मंत्री पद अब संवैधानिक रूप से सुरक्षित हो गया है। इस राजनीतिक सफलता के खास पल की एक तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें मंत्री दीपक प्रकाश अपनी पत्नी साक्षी मिश्रा कुशवाहा को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी साझा करते दिख रहे हैं। वहीं, साक्षी मिश्रा भी उन्हें इस नई उपलब्धि पर बधाई देती नजर आ रही हैं।
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देवेश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर हुए मनोनीत
दीपक प्रकाश को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता देवेश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई बिहार विधान परिषद की सीट पर राज्यपाल द्वारा मनोनीत किया गया है। इस मनोनयन के साथ ही पिछले कई हफ्तों से उनके मंत्री पद पर मंडरा रहा संवैधानिक संकट समाप्त हो गया है।
कौन हैं साक्षी मिश्रा कुशवाहा?
मंत्री दीपक प्रकाश की पत्नी साक्षी मिश्रा कुशवाहा के सोशल मीडिया पर सक्रिय होने और तस्वीरों के वायरल होने के बाद लोग उनके बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार साक्षी मिश्रा कुशवाहा उत्तर प्रदेश के सेवानिवृत्त आईएएस (IAS) अधिकारी एस. एन. मिश्रा की बेटी हैं। वह विभिन्न सामाजिक कार्यों से जुड़ी हुई हैं और सामाजिक गतिविधियों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय रहती हैं।
दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर क्यों मंडरा रहा था संकट?
दीपक प्रकाश को पहली बार किसी भी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) का सदस्य न रहते हुए भी बिहार मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। संवैधानिक नियम: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति बिना किसी सदन का सदस्य बने मंत्री पद की शपथ लेता है, तो उसे 6 महीने के भीतर राज्य के किसी एक सदन की सदस्यता हासिल करना अनिवार्य होता है। ऐसा न करने पर उसे अपना मंत्री पद छोड़ना पड़ता है। दीपक ने पहली बार 20 नवंबर 2025 को मंत्री पद की शपथ ली थी। छह महीने की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी वे सदस्य नहीं बन सके थे। इसके बाद सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई एनडीए (NDA) सरकार के गठन के समय उन्हें दोबारा मंत्री पद की शपथ दिलाई गई, जिसे लेकर कानूनी और संवैधानिक सवाल खड़े हो गए थे।
मामला पहुंचा था सुप्रीम कोर्ट
दीपक को लगातार दूसरी बार बिना सदन का सदस्य बने मंत्री पद की शपथ दिलाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी। याचिका में इस प्रक्रिया को असंवैधानिक और संविधान की मूल भावना के विपरीत बताया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए बिहार सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। हालांकि, अब राज्यपाल कोटे से विधान परिषद के सदस्य (MLC) के रूप में मनोनीत होने के बाद उनका मंत्री पद पूरी तरह सुरक्षित हो गया है और उनसे जुड़े संवैधानिक विवाद का मुख्य बिंदु समाप्त हो गया है।




