नई दिल्ली : चुनाव आयोग को लेकर हाल ही में चल रहे विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की शनिवार को एक महत्वपूर्ण बैठक हुई है। इसी बीच, चुनाव आयोग ने कई

चुनाव आयोग
सीईसी ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी।

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नई दिल्ली : चुनाव आयोग को लेकर हाल ही में चल रहे विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की शनिवार को एक महत्वपूर्ण बैठक हुई है। इसी बीच, चुनाव आयोग ने कई अहम मुद्दों पर अपना पक्ष पूरी तरह से साफ कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग की किसी नीति या आईटी विभाग से जुड़ा मामला नहीं था, बल्कि यह आयोग में प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था।

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मीडिया रिपोर्टों में मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों के बीच कुछ फैसलों को लेकर मतभेद की बात सामने आई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। इस पर आयोग ने कहा है कि ऐसे नोट और अलग-अलग सुझाव आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा होते हैं और पिछले एक साल में आयोग के सभी फैसले पूरी तरह सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र की सच्चाई

चुनाव आयोग ने साफ किया है कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग की किसी नीति या उसके आईटी डिवीजन से बिल्कुल नहीं जुड़ा था। आयोग के मुताबिक, यह पत्र प्रतिनियुक्ति पर आयोग में काम कर रहे एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था। यानी आयोग ने इस पत्र को अपनी किसी चुनावी नीति या आईटी व्यवस्था में बदलाव से जोड़ने की बात को पूरी तरह खारिज किया है।

संबंधित अधिकारी ने काम के पुनर्वितरण से जुड़े जो आदेश जारी किए थे, उन्हें वास्तव में लागू नहीं किया गया था। दोनों चुनाव आयुक्तों के आदेश के बाद काम के पुनर्वितरण वाले उन आदेशों को रोक दिया गया था। आयोग के अनुसार, डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की आईटी डिवीजन पर निगरानी वास्तव में कभी वापस नहीं ली गई। यानी आईटी डिवीजन की निगरानी हटाए जाने की बात को आयोग ने सही नहीं माना है।

गोवा और एसआईआर के तहत मतदाताओं की स्थिति

गोवा में एसआईआर के दौरान छूटे 97 मतदाताओं को लेकर भी चुनाव आयोग ने स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने बताया कि गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ को इन मतदाताओं के घर-घर जाकर उनके फॉर्म लेने का सख्त निर्देश दिया है। आयोग के मुताबिक, 97 में से 81 मतदाता पहले ही फॉर्म-6 भर चुके हैं, ताकि उनका नाम मतदाता सूची में फिर से शामिल किया जा सके। इसका मतलब यह है कि एसआईआर के दौरान नाम छूट जाने के बाद भी मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का पूरा रास्ता खुला हुआ है।

चुनाव आयोग के अनुसार, एसआईआर अब तक देश के 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा हो चुका है, जिनमें बिहार और पश्चिम बंगाल भी शामिल हैं। आयोग ने कहा कि यदि एसआईआर के दौरान या उसके बाद किसी भी व्यक्ति का नाम छूट गया है, तो वह संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी यानी ईआरओ के पास आवेदन देकर अपना नाम जुड़वा सकता है। यह सुविधा युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं के लिए भी उपलब्ध है। आयोग ने सीईओ, डीईओ और ईआरओ को ऐसे मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है।

दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ाई गई समयसीमा

इसके अलावा, चुनाव आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा को भी बढ़ा दिया है। आयोग के मुताबिक, दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध पर अब दावे और आपत्तियां दाखिल करने की आखिरी तारीख 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। वहीं, नोटिस और दावे-आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा को बढ़ाकर 30 नवंबर 2026 कर दिया गया है। इसी तरह महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की तारीख 12 अक्टूबर 2026 और इनके निपटारे की तारीख 10 नवंबर 2026 तय कर दी गई है।

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