जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए जिला प्रशासन ने रोकथाम अभियान तेज करने का निर्णय लिया है। सोमवार को समाहरणालय सभागार में डीसी राजीव रंजन की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में मलेरिया की स्थिति, जांच अभियान, उपचार व्यवस्था और बचाव उपायों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक, सिविल सर्जन, नगर निकायों के पदाधिकारी, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ), चिकित्सा पदाधिकारी (एमओआईसी), जुस्को के प्रतिनिधि तथा संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। उपायुक्त ने बताया कि जिले में अब तक 22 हजार लोगों की मलेरिया जांच की जा चुकी है, जबकि प्रशासन ने एक लाख लोगों की जांच का लक्ष्य तय किया है।
जांच अभियान तेज करने के निर्देश
डीसी राजीव रंजन ने सभी अधिकारियों को अलर्ट मोड में कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोगों की जांच कर संक्रमित मरीजों की समय पर पहचान करना संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने का सबसे प्रभावी तरीका है। अधिकारियों को लक्ष्य के अनुरूप जांच अभियान में तेजी लाने और प्रत्येक संदिग्ध मरीज की जांच सुनिश्चित करने को कहा गया।
उन्होंने सहियाओं को रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (आरडीटी) का प्रशिक्षण देकर गांव स्तर पर जांच सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। साथ ही मरीजों के दवा सेवन की निगरानी फोटो, व्हाट्सएप और जीपीएस आधारित रिपोर्टिंग के माध्यम से करने को कहा, ताकि कोई भी मरीज बीच में उपचार न छोड़े।
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प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान
डीसी ने प्रभावित और सीमावर्ती गांवों के अलावा छात्रावासों, आवासीय विद्यालयों तथा अन्य सामूहिक आवासीय परिसरों में विशेष जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए। सभी बीडीओ को प्रतिदिन अपने क्षेत्र में नए मरीजों की जानकारी लेने और प्रखंड स्तर पर मलेरिया नियंत्रण कार्यों की नियमित समीक्षा करने को कहा गया।
इसके अलावा गंभीर मरीजों को 30 मिनट के भीतर एंबुलेंस उपलब्ध कराने, प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में दवाएं, जांच किट और कीटनाशकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा नियमित फॉगिंग कराने के निर्देश भी दिए गए। नगर निकायों को अगले तीन से चार दिनों के भीतर बड़े और छोटे नालों की विशेष सफाई कर जलजमाव समाप्त करने और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने को कहा गया।
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पोटका में सबसे अधिक असर
जिला प्रशासन के अनुसार पूर्वी सिंहभूम में मलेरिया का सबसे अधिक प्रभाव पोटका प्रखंड में देखा जा रहा है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने वहां विशेष निगरानी और नियंत्रण अभियान शुरू कर दिया है।




