नई दिल्ली : JMM की राज्यसभा सांसद महुआ माझी ने परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि केवल सख्त कानून बना देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कानून का प्रभावी क्रियान्वयन और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना भी जरूरी है। हाल ही में पारित पब्लिक एग्जामिनेशन्स (अमेंडमेंट) बिल और परीक्षा में पेपर लीक की घटनाओं के संदर्भ में प्रतिक्रिया देते हुए महुआ माझी ने कहा कि सरकार का परीक्षाओं को गंभीरता से लेना और कड़े कानून बनाना स्वागतयोग्य कदम है। हालांकि, केवल कानून लागू करने से ही समस्या का समाधान नहीं होगा।
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पारदर्शिता और जवाबदेही से बहाल होगा छात्रों का भरोसा
महुआ माझी ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और संबंधित अधिकारियों की प्रतिबद्धता सुनिश्चित किए बिना छात्रों का भरोसा पूरी तरह बहाल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए केवल कानूनी प्रावधान पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए जरूरी है कि नियमों का प्रभावी ढंग से पालन हो और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाए।
निर्भया कांड का उदाहरण देते हुए कही यह बात
महुआ माझी ने अपने बयान में निर्भया कांड का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि उस घटना के बाद देश में सख्त कानून बनाए गए थे, लेकिन इसके बावजूद महिलाओं के खिलाफ अपराध पूरी तरह नहीं रुक सके। उनका कहना था कि यह उदाहरण बताता है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं होता। कानून का प्रभावी पालन और संबंधित लोगों की जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
विपक्ष के रचनात्मक सुझावों पर विचार की अपील
महुआ माझी ने सरकार से विपक्ष की ओर से दिए जाने वाले रचनात्मक सुझावों पर भी गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सभी पक्षों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की जरूरत दोहराते हुए कहा कि इससे छात्रों का विश्वास बनाए रखने में मदद मिलेगी।




