बाघ संरक्षण पर झारखंड हाईकोर्ट का सख्त रूख, केंद्र और राज्य सरकार से मांगी विस्तृत जानकारी

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने बाघों के संरक्षण से जुड़ी जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और केंद्र सरकार से महत्वपूर्ण बिंदुओं पर शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर अदालत ने पुनर्वासित ग्रामीणों को

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने बाघों के संरक्षण से जुड़ी जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और केंद्र सरकार से महत्वपूर्ण बिंदुओं पर शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर अदालत ने पुनर्वासित ग्रामीणों को आवंटित जमीन की रसीद जारी करने की प्रक्रिया और प्रस्तावित रेलवे लाइन के एलाइनमेंट की स्थिति पर विस्तृत जानकारी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई दो माह बाद होगी।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि बाघ संरक्षण क्षेत्र के भीतर रहने वाले जिन ग्रामीणों का पुनर्वास कर अन्य स्थानों पर बसाया गया है, उन्हें आवंटित जमीन की रसीद (दाखिल-खारिज संबंधी प्रक्रिया) जारी करने के प्रस्ताव को संबंधित मंत्री से स्वीकृति मिल चुकी है।

अब यह प्रस्ताव कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा गया है। सरकार ने कहा कि आगामी कैबिनेट बैठक में स्वीकृति मिलने के बाद पुनर्वासित परिवारों को आवंटित जमीन की रसीद जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

इस पर अदालत ने राज्य सरकार को इन तथ्यों की पुष्टि करते हुए शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया। वहीं, बाघ संरक्षण क्षेत्र से जुड़े रेलवे लाइन निर्माण के मुद्दे पर अदालत ने केंद्र सरकार को भी निर्देश दिया कि प्रस्तावित रेल लाइन के एलाइनमेंट और निर्माण की वर्तमान स्थिति का पूरा ब्योरा शपथ पत्र के माध्यम से अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
वन विभाग के योजना मद की राशि की निकासी पर रोक हटी
झारखंड हाई कोर्ट ने गुरुवार को वन विभाग को आंशिक राहत देते हुए योजना मद से राशि की निकासी पर लगी रोक हटा दी। इससे बिरसा जैविक उद्यान सहित वन विभाग की विभिन्न योजनाओं का संचालन फिर से शुरू हो सकेगा।

हालांकि कोर्ट ने गैर योजना मद से राशि निकासी पर लगी रोक फिलहाल बरकरार रखी है। इस कारण विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन का भुगतान अभी भी नहीं हो सकेगा।

यह आदेश हाईकोर्ट ने रिटायर्ड रेंजर आनंद कुमार की याचिका से जुड़े मामले में सरकार की ओर से दायर हस्तक्षेप याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। इससे पहले कोर्ट ने आनंद कुमार के बकाया भुगतान होने तक वन विभाग के योजना और गैर योजना, दोनों मदों से राशि निकासी पर रोक लगा दी थी।

राशि निकासी पर रोक लगने के कारण चिड़ियाघर के जानवरों के भोजन, पेयजल, साफ-सफाई और अन्य आवश्यक व्यवस्था पर संकट खड़ा हो गया था। योजना मद से ही जानवरों के रखरखाव, पौधारोपण, विभिन्न विकास योजनाओं तथा दैनिक मजदूरों की मजदूरी का भुगतान किया जाता है।

वहीं गैर योजना मद से विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन सहित अन्य प्रशासनिक खर्च पूरे किए जाते हैं। वन विभाग ने इस स्थिति का हवाला देते हुए हाई कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की थी।

विभाग ने अदालत को बताया कि योजना मद से राशि नहीं मिलने के कारण चिड़ियाघर के जानवरों की देखभाल और विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि रिटायर रेंजर आनंद कुमार का कोई बकाया भुगतान शेष नहीं है।

विभाग ने योजना और गैर योजना दोनों मदों से निकासी पर लगी रोक हटाने का अनुरोध किया था। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने योजना मद से राशि निकासी की अनुमति दे दी, जिससे चिड़ियाघर के जानवरों की देखभाल और अन्य विकास कार्यों का रास्ता साफ हो गया।

गैर योजना मद से निकासी पर रोक जारी रहने से वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर फिलहाल संकट बना रहेगा।

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