श्रीनगर : श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर विधानसभा का सत्र सोमवार को शुरू हुआ। पहले दिन की कार्यवाही काफी हंगामेदार रही, क्योंकि विपक्षी पार्टी बीजेपी ने कई सार्वजनिक मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की। जम्मू-कश्मीर विधानसभा का ऑटम सेशन 10 दिनों तक चलेगा, जिसमें कुल सात बैठकें होंगी। सोमवार को सदन में शेख मुस्तफा कमाल, धर्म पॉल और गुलाम हसन खान समेत पूर्व विधायकों और मंत्रियों को श्रद्धांजलि दी गई। शोक प्रस्ताव खत्म होते ही, विपक्षी बीजेपी ने प्रश्नकाल के दौरान कई सार्वजनिक मुद्दे उठाए।
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बीजेपी ने उठाए सार्वजनिक मुद्दे
बीजेपी ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन, दैनिक वेतन भोगियों के नियमितीकरण और पानी तथा बिजली की आपूर्ति जैसे मुद्दे उठाए। बीजेपी विधायक नारेबाजी करते हुए और हाथों में तख्तियां लेकर अपनी सीटों पर खड़े हो गए। विधानसभा स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने निर्देश दिया कि बीजेपी के इस विरोध प्रदर्शन को रिकॉर्ड न किया जाए। स्पीकर ने सदस्यों से अपनी बारी आने पर बात रखने को कहा, लेकिन विपक्ष नहीं माना और “भारत माता की जय” के नारे लगाए। बीजेपी विधायक सदन के वेल में आ गए और अपना विरोध जारी रखा।
सत्ता पक्ष की मांग और डिप्टी सीएम का बयान
विरोध प्रदर्शन के दौरान, सत्ताधारी दल के विधायकों ने भी राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग करते हुए नारे लगाए। CPI(M) विधायक एम.वाई. तारिगामी ने कहा कि सरकार के दो साल बीत चुके हैं, फिर भी राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक अली मोहम्मद सागर ने भी बीजेपी के खिलाफ नारेबाजी की। उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा कि अगर बीजेपी जनता के मुद्दों का समाधान चाहती है, तो उसे सरकार से सवाल पूछने चाहिए। उन्होंने कहा कि ये भाजपा सदस्य केवल मीडिया में रहना चाहते हैं।
सदन में पेश हुईं रिपोर्ट और विधेयक
शुरुआती हंगामे के बाद, हाउस कमेटी ने जल जीवन मिशन (JJM) में एक कथित घोटाले पर रिपोर्ट पटल पर रखी। नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक हसनैन मसूदी ने इस कमेटी की रिपोर्ट पेश की। इसके अलावा, कृषि और सहकारिता मंत्री जाविद अहमद डार ने जम्मू और कश्मीर सहकारी समितियां अधिनियम, 1989 में बदलाव करने और संबंधित विधेयकों को पटल पर पेश किया।









