रांची। झारखंड में लापता व अपहृत बच्चों तथा वयस्कों की तलाश के लिए पुलिस मुख्यालय ने सख्त कदम उठाया है। राज्य की डीजीपी तदाशा मिश्रा के निर्देश पर सभी जिलों के एसपी ने एक विशेष निगरानी सेल का गठन किया है।
यह सेल अब पुरानी फाइलों को खंगालकर ऐसे लापता लोगों का सटीक डेटा जुटाने में लग गई है, जिनका अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। डेटा संकलन पूरा होते ही इनकी बरामदगी के लिए बड़े पैमाने पर तलाश तेज की जाएगी।
डीएसपी मुख्यालय के नेतृत्व में बनी टीम
प्रत्येक जिले में गठित इस निगरानी सेल का नेतृत्व वहां के डीएसपी मुख्यालय (DSP HQ) को सौंपा गया है। इस हाई-प्रोफाइल टीम में एक पुलिस इंस्पेक्टर, संबंधित जिले में पदस्थापित सीआईडी (CID) के एक पदाधिकारी, एक महिला और एक पुरुष सब-इंस्पेक्टर (दारोगा) को शामिल किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में झारखंड पुलिस द्वारा उठाए गए इस कदम के लिए सीआईडी को नोडल एजेंसी बनाया गया है। यह सेल हर 15 दिनों में अपनी प्रगति रिपोर्ट सौंपेगी, और अगस्त में इसकी पहली समीक्षा रिपोर्टिंग होनी है।
मानव तस्करों पर रहेगी पैनी नजर
यह निगरानी सेल केवल लापता लोगों की ट्रैकिंग तक सीमित नहीं रहेगी। टीम राज्य की जेलों में बंद मानव तस्करी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) के आरोपियों और जेल से जमानत पर बाहर आए तस्करों की अद्यतन (Current) स्थिति का पूरा ब्योरा तैयार कर रही है।
तस्करों की मौजूदा सक्रियता और पूर्व में उनके माध्यम से तस्करी किए गए लड़के-लड़कियों के बारे में भी जानकारियां जुटाई जा रही हैं।
इस पूरे अभियान और जांच की प्रगति में तेजी लाने के लिए झारखंड पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) के साथ-साथ इस क्षेत्र में काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों (NGOs) और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की भी सक्रिय मदद ली जा रही है।




