रांची : भारत के गवैया ने भारतीय संगीत और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक नई पहल करते हुए रांची के कांके रोड स्थित कार्यालय से इंडियन लेगेसी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (ILPARI) की स्थापना की घोषणा की है। इसकी जानकारी संस्था के संस्थापक जितेंद्र कुमार ने दी।
Read More :
उन्होंने बताया कि संस्थान की स्थापना का निर्णय भारत के गवैया के पदाधिकारियों और सदस्यों की सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक में संरक्षक अंतु तिर्की, नमिता मिश्रा, आभा सिंह, विभा सिन्हा, जया प्रसाद सहित कई सदस्य मौजूद रहे। इस दौरान कई नए सदस्यों ने भी संगठन से जुड़कर सांस्कृतिक अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
संगीत, अभिनय और फिल्म निर्माण सहित कई विधाओं का मिलेगा प्रशिक्षण
संस्थान के पहले चरण में कांके रोड स्थित प्रशिक्षण केंद्र पर भारतीय शास्त्रीय संगीत, सुगम संगीत और विभिन्न वाद्य यंत्रों का नियमित प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा। इसके अलावा फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, साउंड रिकॉर्डिंग, म्यूजिक कंपोजिशन, गीत लेखन, अभिनय, निर्देशन, फिल्म निर्माण, फिल्म संपादन, कोरियोग्राफी, कैमरा संचालन, भारतीय शास्त्रीय नृत्य और अन्य सांस्कृतिक विधाओं में भी चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण देने की योजना है।
Read More : रांची नगर निगम के फैसले के विरोध में व्यापारी लामबंद, उग्र आंदोलन की चेतावनी
संस्थान का दीर्घकालिक लक्ष्य सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, डिग्री, मास्टर डिग्री और पीएचडी स्तर तक के पाठ्यक्रम शुरू करना है। इसके लिए विभिन्न विश्वविद्यालयों से शैक्षणिक संबद्धता स्थापित करने की प्रक्रिया भी जारी है।
गरीब और दिव्यांग विद्यार्थियों को मिलेगा मुफ्त प्रशिक्षण
संस्थान के पहले फैकल्टी इंचार्ज के रूप में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से संगीत में स्नातक अजय सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके नेतृत्व में प्रशिक्षण कार्यक्रम जल्द शुरू होंगे। प्रारंभिक चरण में कक्षाएं प्रत्येक रविवार को कांके रोड स्थित केंद्र में संचालित की जाएंगी। भारत के गवैया ने घोषणा की है कि आर्थिक रूप से कमजोर, गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले, दिव्यांग और आर्थिक रूप से असमर्थ प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को संस्थान में निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा।
Read More : रांची नगर निगम की नई विकास योजना शुरू, वार्ड-10 में PCC पथ निर्माण का शिलान्यास
रिकॉर्डिंग स्टूडियो और विश्वविद्यालय बनाने की भी योजना
संस्था कांके रोड स्थित कार्यालय में आधुनिक रिकॉर्डिंग एवं कंटेंट प्रोडक्शन स्टूडियो भी स्थापित करेगी। यहां तैयार सामग्री को भारत के गवैया के डिजिटल मंचों और 40 से अधिक OTT प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित करने की योजना है। संस्थापक जितेंद्र कुमार ने बताया कि भविष्य में ILPARI को एक पूर्ण विकसित विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य है। इसके लिए रांची के कामरे क्षेत्र में लगभग 68 डिसमिल भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। प्रस्तावित विश्वविद्यालय भारतीय संगीत, नृत्य, रंगमंच, लोककला, फिल्म और मीडिया अध्ययन के क्षेत्र में शोध एवं प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र बनाने की योजना पर आधारित है।
Read More : जगन्नाथपुर रथ यात्रा के लिए नगर निगम अलर्ट, रूट और मेला क्षेत्र का निरीक्षण



