स्वतंत्र भारद्वाज की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में आज सुनवाई

नई दिल्ली : खुद को सोशल मीडिया ‘इन्फ्लुएंसर’ बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी और हिरासत को गैर-कानूनी बताते हुए दायर की गई ‘हेबियस कॉर्पस’ (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट सोमवार को तत्काल सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय के समक्ष भारद्वाज के वकील

स्वतंत्र भारद्वाज

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नई दिल्ली : खुद को सोशल मीडिया ‘इन्फ्लुएंसर’ बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी और हिरासत को गैर-कानूनी बताते हुए दायर की गई ‘हेबियस कॉर्पस’ (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट सोमवार को तत्काल सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय के समक्ष भारद्वाज के वकील उमेश शर्मा ने इस मामले को उठाया, जिसके बाद अदालत ने याचिका को तुरंत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की मांग स्वीकार कर ली।

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एक दिन की न्यायिक हिरासत

स्वतंत्र भारद्वाज को शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधियों द्वारा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात और त्वरित कार्रवाई की मांग के बाद यह गिरफ्तारी हुई। कड़कड़डूमा कोर्ट में पेशी के बाद पहले उन्हें एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया था। पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद रविवार को ड्यूटी ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (जेएमएफसी) अंजलि सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करते हुए आरोपी को एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि दिल्ली पुलिस ने 14 दिनों की रिमांड मांगी थी।

मारपीट, पॉक्सो और एससी/एसटी एक्ट की धाराएं जोड़ी गईं

पुलिस के अनुसार, भारद्वाज पर जुलाई में जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग एक्टिविस्ट के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट करने का आरोप है। पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद एफआईआर में एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम और आपराधिक धमकी देने की धाराएं जोड़ दीं। इसके अलावा, नाबालिग एक्टिविस्ट की शिकायत पर ऑनलाइन दुष्कर्म की धमकी और उत्पीड़न के आरोप में भारद्वाज के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट के तहत एक नई एफआईआर भी दर्ज की गई है।

चिराग पासवान ने दर्ज कराई शिकायत

भारद्वाज के वकील उमेश शर्मा ने दिल्ली पुलिस पर कानूनी प्रक्रियाओं के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि तय मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के बजाय पुलिस ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक अलग एससी/एसटी कोर्ट में पेशी कराकर रिमांड हासिल की, जो गैर-कानूनी है। उधर, इस पूरे विवाद की शुरुआत एक वायरल वीडियो के बाद हुई, जिसमें भारद्वाज ने कथित तौर पर दावा किया था कि उन्होंने जंतर-मंतर पर मारपीट की और राजनीतिक संपर्कों की वजह से बच गए। इस वीडियो में नाम घसीटे जाने पर केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने कड़ा रुख अपनाया है। चिराग पासवान ने स्पष्ट किया कि उनके नाम का गलत इस्तेमाल किया गया है और उन्होंने भारद्वाज के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज कराते हुए पीड़िता को न्याय दिलाने की बात कही है।

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