रांची। रांची पूर्व मंत्री एवं झारखंड सरकार की समन्वय समिति के सदस्य बंधु तिर्की ने कहा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एस.आई.आर.) की समय सीमा को झारखंड में कम-से-कम एक माह के लिये बढ़ाया जाना बहुत अधिक आवश्यक है। उन्होंने कहा कि झारखंड की स्थिति अन्य प्रदेशों से बिल्कुल अलग है और भौगोलिक रूप से यहां वैसे अनेक जिले, गांव और क्षेत्र हैं जो दूर-दराज हैं।अनेक मतदाता वैसे दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों और कस्बों में रहते हैं जिनमें से बहुत सारे घने जंगल के बीच में हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भेजे गये अपने पत्र में श्री तिर्की ने कहा कि झारखंड में वर्तमान समय में अनेक मतदाता पलायन कर दूसरे प्रदेशों में काम करने और कमाने के लिये गये हुए हैं। इसीलिये भी यहां एस.आई.आर. की समय सीमा को बढ़ाया जाना जरूरी है। तिर्की ने कहा कि जब भी दिल्ली से चुनाव आयुक्त आयोग के द्वारा राज्यों के लिये कोई भी दिशानिर्देश जारी किया जाये तो उसमें विशेष रूप से झारखंड की जमीनी सच्चाई एवं भौगोलिक परिप्रेक्ष्य को अवश्य ध्यान में रखा जाना चाहिये अन्यथा अनेक वैध नागरिकों को भी अपने मौलिक अधिकार से वंचित रहना पड़ सकता है, जो किसी भी तरीके से ना तो संविधान के अनुकूल है और ना ही देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए ही यह सही होगा।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि इस संबंध में उनके साथ ही कांग्रेस के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार से मिलकर अपना ज्ञापन सौंपा था. लेकिन उक्त मामले पर चुनाव आयोग के द्वारा अबतक कोई भी सकारात्मक निर्णय नहीं लिये जाने के कारण न केवल राजनीतिक नेताओं, कार्यकर्ताओं बल्कि, आम लोगों में भी निराशा और संशय का वातावरण है।
बधु तिर्की ने मुख्य चुनाव आयुक्त से मांग की है कि झारखंड जैसे प्रदेश में कोई भी वैध मतदाता, मतदाता सूची से अलग नहीं हो सकने को सुनिश्चित किया जाना चाहिये और इसके लिये यह बहुत आवश्यक है कि सभी संबंधित अधिकारियों के साथ ही मुख्य रूप से सभी बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) को यह निर्देश दिया जाये कि वे सभी मतदाताओं के साथ पूरे सौहार्दपूर्ण वातावरण में उनके सहयोगी के रूप में कार्य करें। क्योंकि, झारखण्ड में अधिकतर लोग भोले-भाले हैं और उनके लिये संबंधित प्रपत्र और अपने आवश्यक दस्तावेजों को उपाय कर उसे जमा करना उनके लिये जटिल प्रक्रिया है



