रांची। झारखंड आंदोलनकारी महासभा की बैठक केंद्रीय अध्यक्ष राजू महतो की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में राज्य के सभी 24 जिलों से आए प्रमुख आंदोलनकारियों ने हिस्सा लिया और झारखंड आंदोलन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में आंदोलनकारियों के सम्मान, पहचान, पेंशन और उनके अधिकारों को लेकर सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय अध्यक्ष राजू महतो ने कहा कि झारखंड अलग राज्य बनने के बाद से महासभा लगातार वास्तविक आंदोलनकारियों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग फर्जी तरीके से आंदोलनकारी का दर्जा हासिल कर रहे हैं, जिससे वास्तविक आंदोलनकारियों के सम्मान और अधिकारों को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्व आंदोलनकारी संगठनों को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं और सरकार भी इन्हीं कारणों से स्पष्ट नीति बनाने में असमर्थ दिखाई दे रही है। राजू महतो ने राज्य सरकार से मांग की कि वास्तविक आंदोलनकारियों की पहचान सुनिश्चित कर उन्हें सम्मानजनक पहचान, पेंशन तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
साथ ही झारखंड आंदोलन के दौरान शहीद हुए आंदोलनकारियों को आधिकारिक रूप से शहीद का दर्जा दिया जाए तथा उनकी स्मृति में झारखंड आंदोलनकारी कॉरिडोर का निर्माण कराया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां आंदोलन के इतिहास और बलिदानों से प्रेरणा ले सकें। बैठक में आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तय की गई।
4 अगस्त को दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पुण्यतिथि
महासभा ने निर्णय लिया कि 4 अगस्त को दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई जाएगी, जबकि 8 अगस्त को शहीद निर्मल महतो दिवस और झारखंड आंदोलनकारी महासभा का स्थापना दिवस राज्यभर में विभिन्न कार्यक्रमों के साथ आयोजित किया जाएगा। महासभा के केंद्रीय उपाध्यक्ष किशोर किस्को ने कहा कि झारखंड राज्य का निर्माण आंदोलनकारियों के लंबे संघर्ष और बलिदान का परिणाम है।
इसलिए सरकार का दायित्व है कि वह आंदोलनकारियों को उनका उचित मान-सम्मान और अधिकार प्रदान करे तथा उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करे। बैठक में अमर किंडो, विशेषण महतो, किशोर किस्को, अनिल कुमार भगत, लक्ष्मी रवानी, विजय मांझी, शंकर वर्मा, अनंतो प्रमानिक, अशोक रवानी, रामनाथ दुबे, राम कुमार दुबे सहित बड़ी संख्या में झारखंड आंदोलनकारी उपस्थित रहे। बैठक के अंत में आंदोलनकारियों की एकजुटता बनाए रखने और उनके अधिकारों की लड़ाई को और मजबूती से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया ।




