दशलक्षण पर्व का समापन, रांची में 16 व्रतधारियों का हुआ सम्मान

रांची : दशलक्षण महापर्व के समापन के उपलक्ष्य में रांची जैन समाज की ओर से अपर बाजार जैन मंदिर सभागार में व्रतधारी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समाज के अध्यक्ष प्रदीप बाकलीवाल, पूरी कार्यकारिणी और समाज के सदस्यों की मौजूदगी में कार्यक्रम आयोजित हुआ।

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16 श्रावक-श्राविकाएं सम्मानित

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रांची : दशलक्षण महापर्व के समापन के उपलक्ष्य में रांची जैन समाज की ओर से अपर बाजार जैन मंदिर सभागार में व्रतधारी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समाज के अध्यक्ष प्रदीप बाकलीवाल, पूरी कार्यकारिणी और समाज के सदस्यों की मौजूदगी में कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस वर्ष समाज के कुल 16 व्रतधारियों ने दशलक्षण महाव्रत की साधना की। इनमें 5 पुरुष और 11 महिलाएं शामिल थीं। सभी श्रावक-श्राविकाओं ने दस दिनों तक व्रत और उपवास के जरिए आत्म-साधना की।

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कार्यक्रम का संचालन जैन समाज के मंत्री जीतेन्द्र छाबड़ा ने किया। सौरभ विनायक्या के मंगलाचरण के बाद हेमन्त सेठी और उदित सेठी ने अभिनंदन गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद अध्यक्ष प्रदीप बाकलीवाल और समाज के पदाधिकारियों ने सभी व्रतधारियों को अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र भेंट कर उनके तप की अनुमोदना की।

तपस्या आत्मा को कुंदन बनाती है : आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी

धर्मसभा को संबोधित करते हुए परम पूज्य आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज ने कहा कि दशलक्षण पर्व केवल उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि आत्मावलोकन और विकारों को दूर करने का समय है। उन्होंने सभी 16 व्रतधारियों की सराहना करते हुए कहा कि इंद्रियों पर विजय प्राप्त करना ही सच्ची तपस्या है। उन्होंने कहा कि दस दिनों तक सांसारिक इच्छाओं पर नियंत्रण रखने से कर्म निर्जरा का मार्ग प्रशस्त होता है और व्रत-उपवास से आत्मा शुद्ध होती है।

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जैन समाज ने व्रतधारी को सम्मानित किया

संयम ही सुखी जीवन की कुंजी: मुनिश्री नियोग सागर जी

मुनिश्री नियोग सागर जी महाराज ने अपने संदेश में कहा कि पर्व की पूर्णता तभी है, जब इन दस दिनों में सीखे गए उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव और ब्रह्मचर्य जैसे धर्मों को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाए। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संयम और संतोष को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।

शोभायात्रा के साथ जैन भवन पहुंचे व्रतधारी

सम्मान समारोह और प्रवचन के बाद सभी व्रतियों को शोभायात्रा के साथ जैन भवन, हरमू रोड पहुंचाया गया। यहां परिवारजनों और रिश्तेदारों ने उनका स्वागत किया और उनकी आत्म-साधना में सहभागी बने। कार्यक्रम में समाज के पूर्व अध्यक्ष नरेन्द्र पाण्ड्या, पूरणमल सेठी, छित्तरमल गंगवाल, पदम छाबड़ा, नरेन्द्र गंगवाल, उपाध्यक्ष संजय छाबड़ा, कोषाध्यक्ष प्रमोद झांझरी, पदम गोधा, कमल सेठी, कैलाश बड़जात्या, संजय पाटनी, विनोद झांझरी, सुनील सेठी सहित समाज के अन्य सदस्य मौजूद रहे। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।

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