रांची : MMDR संशोधन अधिनियम-2026 को लेकर झारखंड में सियासी बयानबाजी तेज है। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद यह मुद्दा झारखंड में सत्तारूढ़ JMM और कांग्रेस के विरोध का केंद्र बना हुआ है। इस बीच केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने विपक्ष पर कानून को लेकर लोगों के बीच भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के साथ देश की अर्थव्यवस्था और विकास को गति देना है। उनके मुताबिक, MMDR में संशोधन का उद्देश्य खनन क्षेत्र के लिए अधिक एकरूप और स्पष्ट व्यवस्था तैयार करना है।
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खनन क्षेत्र में एक समान व्यवस्था का दावा
अन्नपूर्णा देवी के मुताबिक, MMDR संशोधन के जरिए खनन क्षेत्र में एक समान व्यवस्था लागू करने की कोशिश की गई है। उनका कहना है कि इससे खनन से जुड़े उद्योगों को कानूनी प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी से राहत मिल सकती है और निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। केंद्र सरकार ने भी संशोधन को खनिज क्षेत्र में स्थिरता, स्पष्टता और पूर्वानुमेयता लाने वाला कदम बताया है। सरकार के अनुसार, खनन क्षेत्र से होने वाले कुल कर और वैधानिक भुगतानों का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को मिलता है और यह व्यवस्था जारी रहेगी।
टैक्स और पुराने बकाये को लेकर क्या है विवाद?
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संशोधन का एक उद्देश्य खनन क्षेत्र में टैक्स व्यवस्था को एकरूप बनाना और उद्योगों को पुराने यानी बैकडेट से लगाए जाने वाले टैक्स की अनिश्चितता से राहत देना है। वहीं, PRS के अनुसार, संशोधन में राज्यों को खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर कुछ टैक्स, सेस या अन्य लेवी लगाने से प्रतिबंधित करने का प्रावधान है, सिवाय उन परिस्थितियों के जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया जा सकता है। संशोधन से पहले के कुछ अवैतनिक या वसूल न किए गए राज्य लेवी को अमान्य करने का भी प्रावधान है। इन्हीं प्रावधानों को लेकर केंद्र और झारखंड के बीच राजनीतिक मतभेद सामने आए हैं। JMM और कांग्रेस ने कानून के खिलाफ आंदोलन किया है और इसे राज्यों के अधिकार तथा राजस्व से जोड़कर सवाल उठाए हैं।
झारखंड सरकार पर भी अन्नपूर्णा देवी का निशाना
अन्नपूर्णा देवी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासित राज्यों को छोड़कर अन्य जगहों पर इस कानून का उसी तरह विरोध नहीं हुआ है। उन्होंने झारखंड सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राज्य सरकार कोयला आधारित गतिविधियों के जरिए अधिक टैक्स और राजस्व हासिल करना चाहती है, इसलिए वह MMDR संशोधन का विरोध कर रही है। हालांकि, झारखंड में JMM और कांग्रेस की ओर से इस कानून का लगातार विरोध किया गया है। JMM ने संशोधित कानून के खिलाफ राज्यभर में आंदोलन की घोषणा की थी, जबकि कांग्रेस ने भी इसके खिलाफ राज्यव्यापी विरोध कार्यक्रम चलाने की बात कही थी।
खनिज राजस्व और राज्यों के अधिकार पर बहस
MMDR संशोधन को लेकर मुख्य बहस राज्यों के खनिज अधिकारों, खनिज-युक्त भूमि पर लेवी और पुराने टैक्स बकाये से जुड़े प्रावधानों पर है। PRS के अनुसार, संशोधन से राज्यों की कुछ कर लगाने की शक्तियों पर प्रतिबंध लगाया गया है। वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि संशोधन का उद्देश्य खनन क्षेत्र में एक समान और स्थिर वित्तीय व्यवस्था बनाना है। केंद्र के अनुसार, राज्यों को खनन क्षेत्र से मिलने वाले राजस्व का बड़ा हिस्सा आगे भी मिलता रहेगा।




