रांची : रिम्स और जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल से होमगार्ड जवानों को हटाने की कार्रवाई से जवानों में नाराजगी है। इस कार्रवाई के खिलाफ झारखंड होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से दखल देने की गुहार लगाई है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर दोनों सरकारी अस्पतालों से जवानों को हटाने की कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। साथ ही, साल 2021 में राज्य सरकार ने होमगार्ड जवानों के हित में जो फैसला लिया था, उसे पूरे झारखंड में सही तरीके से लागू करने की भी मांग उठाई है।
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सीएम को पत्र लिखकर रोजगार बचाने की मांग
एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव राजीव कुमार तिवारी ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि वर्ष 2021 में होमगार्ड जवानों के आंदोलन के बाद सरकार ने उनके रोजगार और आजीविका को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया था। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने 12 अप्रैल 2021 और 27 अगस्त 2021 को पत्र जारी कर सरकारी विभागों और संस्थानों में सुरक्षा संबंधी कार्य होमगार्ड जवानों से लेने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की पहल की थी। इससे हजारों जवानों को सरकारी संस्थानों में रोजगार मिलने की उम्मीद जगी थी। एसोसिएशन का कहना है कि रिम्स और एमजीएम अस्पताल से जवानों को हटाने की कार्रवाई से उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। इन अस्पतालों में जवान लंबे समय से सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। जवानों को हटाने का फैसला उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भी सीधा असर डालेगा।
सरकारी आदेश के अनुपालन पर उठाए सवाल
एसोसिएशन ने पत्र में सवाल उठाया है कि जब सरकार ने सरकारी संस्थानों में सुरक्षा कार्य होमगार्ड जवानों से लेने की पहल की थी, तो अब उन्हें सरकारी अस्पतालों से हटाने की कार्रवाई क्यों की जा रही है। एसोसिएशन के मुताबिक, बड़ी संख्या में होमगार्ड जवान ग्रामीण, आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। उनके परिवारों का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और इलाज ड्यूटी से मिलने वाले मानदेय पर निर्भर है।
निजी सुरक्षा एजेंसियों की जगह होमगार्ड की तैनाती की मांग
एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि राज्य के सभी सरकारी विभागों और संस्थानों में सुरक्षा कार्यों के लिए निजी सुरक्षा एजेंसियों की जगह होमगार्ड जवानों की तैनाती की जाए। जिन जिलों में जवान ड्यूटी से वंचित हैं, उन्हें भी सरकारी संस्थानों में उपलब्ध सुरक्षा कार्यों के अनुरूप ड्यूटी दी जाए। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग और गृह विभाग के बीच समन्वय स्थापित कर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने का आग्रह किया गया है।
विरोध नहीं, रोजी-रोजगार का सवाल
प्रदेश महासचिव राजीव कुमार तिवारी ने बताया कि एसोसिएशन किसी विभाग या मंत्री का विरोध नहीं कर रहा है। उनकी मांग केवल इतनी है कि सरकार के पूर्व के निर्णयों की भावना का सम्मान हो और जवानों की आजीविका पर संकट नहीं आने दिया जाए। पत्र की प्रतिलिपि स्वास्थ्य मंत्री, मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग के प्रधान सचिव और गृह रक्षा वाहिनी के महानिदेशक को भी भेजी गई है।



