देवघर में CJI सूर्यकांत का बड़ा संदेश, दूरदराज के गांवों तक पहुंचे कानूनी मदद

देवघर : देवघर के सिविल कोर्ट परिसर में आयोजित राज्यस्तरीय विधिक सेवा सह सशक्तीकरण शिविर का उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने किया। झालसा, रांची और देवघर जिला प्रशासन की ओर से मिलकर इस शिविर का आयोजन किया गया था। इस दौरान CJI

सूर्यकांत

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देवघर : देवघर के सिविल कोर्ट परिसर में आयोजित राज्यस्तरीय विधिक सेवा सह सशक्तीकरण शिविर का उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने किया। झालसा, रांची और देवघर जिला प्रशासन की ओर से मिलकर इस शिविर का आयोजन किया गया था। इस दौरान CJI सूर्यकांत ने झारखंड में झालसा की ओर से चलाए जा रहे ‘प्रोजेक्ट शिशु’ की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह योजना समाज में बदलाव लाने वाली सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है।

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प्रोजेक्ट शिशु को देशभर में लागू करने की अपील करेंगे

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि जिन बच्चों को विपरीत परिस्थितियों के कारण शिक्षा नहीं मिल सकी और जिन्हें बचपन में ही भूख मिटाने, जीवनयापन और रोजी-रोटी के लिए काम करना पड़ा, उन्हें शिक्षा के माध्यम से जागरूक नागरिक बनाना और आत्मनिर्भर बनाना देश के लिए बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों को समाज का अहम हिस्सा बनाने के लिए झारखंड की विधिक सेवा प्राधिकार बधाई की पात्र है। इस योजना को झारखंड में लागू करने के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की विशेष रूप से चर्चा की। CJI सूर्यकांत ने कहा कि वह राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण से इस विशेष योजना को देश के उन अन्य राज्यों में भी लागू करने की अपील करेंगे, जहां अभी तक इसे शुरू नहीं किया गया है।

दूरदराज के क्षेत्रों में कानूनी जागरूकता पर जोर

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लीगल एड के छोटे-छोटे क्लीनिक लोगों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक कर रहे हैं। दूरदराज के क्षेत्रों में खोले गए इन क्लीनिकों की संख्या और बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लोगों तक पहुंचने की दिशा में यह एक ठोस कदम है। झालसा को ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन लगातार करते रहना चाहिए।

शिक्षा से पहले गांवों तक पहुंचें लीगल वालंटियर

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि दूरदराज के गांवों और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में, जहां आवागमन के साधन उपलब्ध नहीं हैं और शिक्षा का अभाव है, वहां शिक्षा की रोशनी पहुंचने से पहले लीगल वालंटियर पहुंचें। उन्होंने कहा कि लीगल वालंटियर लोगों को उनके कानूनी अधिकारों से अवगत कराएं। अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए लोगों को जागरूक करने में उनकी बहुत बड़ी भूमिका है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लीगल वालंटियर जरूरतमंद, गरीब और मजबूर लोगों को न्याय दिलाने में एक सूत्रधार की भूमिका निभाते हैं।

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