रांची: रांची जिले में सरकारी राशन का लाभ लेने में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। आयकर के आंकड़ों के सत्यापन में 6 लाख रुपये से अधिक सालाना आय वाले 6556 परिवार जन वितरण प्रणाली (PDS) के तहत मिलने वाले सरकारी अनाज का लाभ लेते पाए गए हैं। ये परिवार वर्ष 2015 से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत खाद्यान्न का लाभ उठा रहे थे। अब जिला आपूर्ति विभाग ने ऐसे राशन कार्डधारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग ने सरकारी अनाज पर मिली सब्सिडी की राशि वसूलने के लिए नोटिस जारी किया है।
जिला आपूर्ति शाखा की ओर से जारी नोटिस में संबंधित परिवारों को 15 दिनों के भीतर जुर्माने की राशि जमा करने और अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है। निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं करने या संतोषजनक जवाब नहीं देने पर संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की चेतावनी दी गई है। विभाग अब तक लिए गए राशन की वसूली बाजार दर से करेगा। इसके साथ ही वसूली की राशि पर 12 प्रतिशत सालाना ब्याज भी लगाया जा सकता है।
आयकर के आंकड़ों से खुला मामला
जिला आपूर्ति कार्यालय के अनुसार, भारत सरकार से प्राप्त सूची के आधार पर राशन कार्डधारियों के परफॉर्मेंस इंडिकेटर (KPI) डाटा का सत्यापन किया गया। इस दौरान जिले के 6556 परिवारों के सदस्यों की केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के इनकम ग्रुप में सालाना आय छह लाख रुपये से अधिक पाई गई।
आय निर्धारित सीमा से अधिक होने के बावजूद ये परिवार सरकारी राशन का लाभ ले रहे थे। विभाग ने इसे जन वितरण प्रणाली के नियमों का उल्लंघन मानते हुए संबंधित राशन कार्डधारियों को नोटिस जारी किया है।
2015 से ले रहे थे सरकारी अनाज का लाभ
विभाग के मुताबिक, अपात्र होने के बावजूद संबंधित परिवार वर्ष 2015 से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मिलने वाले खाद्यान्न का लाभ उठा रहे थे। नोटिस में कहा गया है कि गलत जानकारी देकर या पात्रता नहीं होने के बावजूद सरकारी राशन का लाभ लेना झारखंड लक्षित जन वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश-2024 की धारा 7 के प्रावधानों के विपरीत है।
15 दिनों में जवाब नहीं दिया तो दर्ज होगी प्राथमिकी
जिला आपूर्ति विभाग ने संबंधित परिवारों को नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर राशि जमा करने और अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। तय समय में राशि जमा नहीं करने या संतोषजनक जवाब नहीं देने पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
विभाग के अनुसार, अपात्र परिवारों द्वारा अब तक लिए गए सरकारी राशन की वसूली बाजार दर के आधार पर की जाएगी। इसके अतिरिक्त बकाया राशि पर 12 प्रतिशत सालाना ब्याज भी लगाया जा सकता है। इस कार्रवाई का उद्देश्य जन वितरण प्रणाली के तहत सरकारी खाद्यान्न का लाभ केवल पात्र परिवारों तक पहुंचाना है।





