JPSC-JSSC आंदोलन में अमीषा प्रसाद का बड़ा आरोप, फर्जी केस का दावा

रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्र आंदोलन जारी है। इसी बीच आंदोलनकारी अमीषा प्रसाद ने बुधवार को रांची प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल

अमीषा प्रसाद
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमीषा प्रसाद।

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रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्र आंदोलन जारी है। इसी बीच आंदोलनकारी अमीषा प्रसाद ने बुधवार को रांची प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। अमीषा प्रसाद ने आरोप लगाया कि आंदोलनकारी छात्रों और युवाओं के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान छात्रों ने किसी भी तरह के प्रोटोकॉल का उल्लंघन नहीं किया।

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शहबाज आलम को दी टेबल टॉक की चुनौती

अमीषा प्रसाद ने आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने वाले शहबाज आलम पर भी निशाना साधा। उन्होंने उन्हें आमने-सामने बातचीत यानी टेबल टॉक की खुली चुनौती दी। अमीषा ने कहा कि यदि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सही हैं तो संबंधित पक्ष सामने आकर उनके प्रमाण पेश करे। उनके मुताबिक, आमने-सामने बातचीत से यह स्पष्ट हो सकता है कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। दरअसल, शहबाज आलम की ओर से अमीषा प्रसाद के खिलाफ दंगा फैलाने और मारपीट जैसे आरोपों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। हालांकि, अमीषा का दावा है कि आंदोलन के दौरान छात्रों ने किसी भी तरह के प्रोटोकॉल का उल्लंघन नहीं किया।

बिना नोटिस हिरासत में लेने का आरोप

अमीषा प्रसाद ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बिना किसी पूर्व नोटिस या वारंट के घर से हिरासत में लिया गया और करीब छह से सात घंटे तक रखा गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सदर थाना प्रभारी की ओर से उन्हें पुराने मामलों में फंसाने का प्रयास किया गया। अमीषा के मुताबिक, मीडिया के सामने भी उनके बारे में गलत जानकारी दी गई।

14 छात्रों पर गंभीर आरोपों में केस का दावा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच ने आरोप लगाया कि करीब 14 पुरुष छात्रों, जिनमें रविंद्र और कुणाल सर समेत अन्य लोग शामिल हैं, के खिलाफ छेड़खानी जैसे गंभीर आरोपों में कथित रूप से झूठी प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। मंच से जुड़ी छात्राओं ने इन आरोपों को गलत बताया। उनका कहना है कि कानून का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर निर्दोष छात्रों को फंसाने की कोशिश की जा रही है, जिससे छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।

पुलिस पर दोहरे रवैये का आरोप

JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच की कोर सदस्य प्रतिमा कुमारी ने प्रशासन पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि एक पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान छात्रों के समर्थन में पहुंची महिलाओं के साथ मारपीट और बदसलूकी की गई। प्रतिमा के अनुसार, इस मामले में शिकायत दर्ज कराने के लिए वह लगातार दो दिनों तक थाने के चक्कर लगाती रहीं, लेकिन पुलिस ने उनकी प्राथमिकी दर्ज नहीं की। मंच ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य के अलग-अलग जिलों में पुलिस की मौजूदगी में छात्रों पर बल प्रयोग किया गया।

CBI जांच और UPSC के जरिए परीक्षा की मांग

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंच ने JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच CID के बजाय CBI से कराने की मांग दोहराई। इसके अलावा आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज कथित फर्जी मुकदमे वापस लेने और JPSC सिविल सेवा परीक्षा को UPSC के माध्यम से कराने की मांग भी रखी गई।

सीएम से सीधे छात्रों से बातचीत की अपील

अमीषा प्रसाद ने मुख्यमंत्री से अधिकारियों के माध्यम से आंदोलन की जानकारी लेने के बजाय सीधे छात्रों से बातचीत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि छात्रों की बात सुनी जानी चाहिए और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। मंच ने चेतावनी दी कि यदि छात्रों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर आंदोलन को दबाने की कोशिश जारी रही और उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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