पटना : बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं परीक्षा में कथित अनियमितताओं समेत विभिन्न मांगों को लेकर शनिवार को पटना में अधिकार मार्च निकाला गया। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और भीम आर्मी के नेतृत्व में निकला यह मार्च गांधी मैदान से शुरू हुआ और जेपी गोलंबर पहुंचते ही पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच नोकझोंक हुई। पुलिस ने करीब 20 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है।
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स्थिति को देखते हुए गांधी मैदान और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों के समर्थन में आगे बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें जेपी गोलंबर से आगे जाने की अनुमति नहीं दी।
जेपी गोलंबर पर पुलिस ने रोका मार्च
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और भीम आर्मी के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी गांधी मैदान से अधिकार मार्च लेकर आगे बढ़े। जेपी गोलंबर पहुंचने पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रास्ता बंद कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद मौके पर पुलिस और उनके बीच नोकझोंक हुई। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया और प्रदर्शन कर रहे करीब 20 लोगों को हिरासत में लिया।
BPSC 70वीं परीक्षा की न्यायिक जांच की मांग
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग BPSC 70वीं परीक्षा में कथित अनियमितताओं की न्यायिक जांच की है। वे BPSC चेयरमैन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके अलावा नगर निकायों में काम करने वाले सफाई कर्मचारियों के जीवन स्तर, वेतन, रोजगार और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग भी मार्च के दौरान उठाई गई।
ऑनलाइन FIR और 85 फीसदी डोमिसाइल नीति की मांग
प्रदर्शनकारियों ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए ऑनलाइन FIR की व्यवस्था लागू करने की मांग भी रखी। इसके साथ ही बिहार की सभी भर्तियों में 85 प्रतिशत डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि BPSC परीक्षा को लेकर छात्रों और युवाओं के साथ कथित तौर पर भेदभावपूर्ण व्यवहार किया गया। उनका कहना है कि पूरी प्रक्रिया में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की तुलना में अमीर वर्ग को फायदा पहुंचाने वाला रवैया दिखाई दिया।
परीक्षा प्रक्रिया रद्द होने तक आंदोलन जारी रखने का दावा
प्रदर्शन में शामिल एक प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि BPSC के मामले में छात्रों और युवाओं के साथ छुआछूत जैसा भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गरीबों की तुलना में अमीरों के पक्ष में भेदभाव दिखाई दे रहा है और परीक्षा के परिणामों में भी कथित तौर पर गड़बड़ी की गई है। प्रदर्शनकारी ने भाजपा सरकार पर गरीबों को गरीब बनाए रखने और उन्हें आगे बढ़ने से रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इसी के विरोध में प्रदर्शनकारी राजभवन की ओर मार्च करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक परीक्षा प्रक्रिया रद्द नहीं की जाती, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने बिहार के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी दोहराई।
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा, “हमारी मांग BPSC के मामले में छात्रों और युवाओं के साथ किए जा रहे भेदभाव को लेकर है। उनके साथ छुआछूत जैसा व्यवहार किया जा रहा है। गरीबों की तुलना में अमीरों के पक्ष में भेदभाव साफ दिखाई दे रहा है और परिणामों में भी कथित तौर पर गड़बड़ी की गई है। भाजपा सरकार गरीबों को गरीब ही बनाए रखना चाहती है और उन्हें आगे बढ़ने से रोकना चाहती है। इसी वजह से हम आज राजभवन तक मार्च कर रहे हैं। जब तक परीक्षा प्रक्रिया रद्द नहीं की जाती, हम यहां से नहीं हटेंगे। इसके अलावा हमारी मांग है कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें।”




