रांची। प्रदेश कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दूबे ने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के मुख्यमंत्री के नाम लिखे खुले पत्र पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि वर्ष 2014 से 2019 तक झारखंड में सत्ता में रही डबल इंजन भाजपा सरकार अपने पूरे कार्यकाल में एक भी जेपीएससी परीक्षा आयोजित नहीं करा सकी। ऐसे में आज छात्रों के हितों की चिंता का दिखावा करना भाजपा की राजनीतिक अवसरवादिता का परिचायक है।
उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को पहले यह बताना चाहिए कि उनके शासनकाल में लाखों युवाओं का भविष्य क्यों अधर में लटका रहा। वर्षों तक नियुक्ति प्रक्रिया ठप रही, युवाओं को रोजगार के अवसर नहीं मिले और प्रतियोगी परीक्षाएं समय पर आयोजित नहीं हो सकीं। उस दौर में छात्रों की पीड़ा भाजपा को क्यों दिखाई नहीं दी?
आलोक ने कहा कि झारखंड राज्य गठन के बाद भाजपा शासनकाल में आयोजित पहली और दूसरी जेपीएससी परीक्षाएं गंभीर विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिर गईं। उन मामलों में कई अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई हुई और कई जेल भी गए। यदि जेपीएससी की साख को सबसे अधिक नुकसान किसी दौर में पहुंचा, तो उसकी जिम्मेदारी से भाजपा और उस समय की सरकार बच नहीं सकती। आज झारखंड के लाखों युवा उसी व्यवस्था की खामियां झेलने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा बार-बार सीबीआई जांच की मांग कर रही है, जबकि पूर्व की कई चर्चित सीबीआई जांच वर्षों बाद भी किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी हैं। दूसरी ओर राज्य सरकार ने सीआईडी जांच शुरू कर कार्रवाई भी की है। गिरफ्तारियां हुई हैं और जांच लगातार आगे बढ़ रही है। आखिर भाजपा सीआईडी जांच से इतनी घबराई हुई क्यों है? क्या भाजपा को यह आशंका सता रही है कि जांच की आंच उसके बड़े नेताओं और उनके संरक्षण में काम करने वाले लोगों तक पहुंच सकती है?
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार छात्रों की भावनाओं के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। सरकार बहुत जल्द छात्र प्रतिनिधियों से संवाद करेगी, उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी तथा उनके भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक और ठोस निर्णय लेगी। राज्य सरकार का उद्देश्य दोषियों को बचाना नहीं, बल्कि उन्हें कानून के दायरे में लाकर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
उन्होंने ने कहा कि भाजपा को छात्रों के भविष्य पर राजनीति करने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए। जिस पार्टी के शासनकाल में नियुक्तियां ठप रहीं और जेपीएससी की विश्वसनीयता पर सबसे बड़े सवाल खड़े हुए, उसे आज युवाओं को गुमराह करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। झारखंड के युवा सच्चाई जानते हैं और उन्हें न्याय दिलाने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।



