रांची : झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने 31 जुलाई 2026 को राज्यपाल के रूप में अपने दो वर्ष का कार्यकाल पूरा किया। इस अवसर पर लोक भवन, रांची में राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, शिक्षाविदों, समाचार-पत्रों के संपादकों, ब्यूरो प्रमुखों, गणमान्य अतिथियों और लोक भवन परिवार के सदस्यों के साथ आत्मीय संवाद के दौरान उन्होंने राज्य की जनता के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की। राज्यपाल ने कहा कि झारखंड की महान संस्कृति, समृद्ध जनजातीय विरासत, प्राकृतिक संपदा और यहां के परिश्रमी व सरल लोगों के बीच कार्य करना उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण और आत्मीय अनुभव रहा है।
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उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में झारखंड की सेवा का अवसर मिलना उनके सार्वजनिक जीवन का एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय था। उन्होंने अपने दायित्वों का निर्वहन निष्ठा, समर्पण और संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप करने का सतत प्रयास किया।
विकास, शिक्षा और जनहित के विषयों को दी प्राथमिकता
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि राज्यपाल का पद केवल एक संवैधानिक दायित्व नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और आकांक्षाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है। इसी भावना के साथ उन्होंने अपने कार्यकाल में राज्य के विकास, शिक्षा, युवाओं, किसानों, महिलाओं तथा वंचित और कमजोर वर्गों के हितों से जुड़े विषयों को प्राथमिकता दी। उन्होंने झारखंड की गौरवशाली विरासत का उल्लेख करते हुए धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू, फूलो-झानो, नीलांबर-पीतांबर, ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव सहित राज्य के सभी अमर सेनानियों और महान विभूतियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
राज्यपाल ने कहा कि इन महान विभूतियों के आदर्श आज भी समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणा देते हैं। पिछले दो वर्षों के दौरान उन्हें राज्य के विभिन्न जिलों, ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों का व्यापक भ्रमण करने तथा समाज के अलग-अलग वर्गों से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया। साथ ही, उन्होंने झारखंड के लोगों की सरलता, परिश्रमशीलता और आत्मीयता को करीब से अनुभव किया। राज्यपाल ने स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की सराहना करते हुए कहा कि विकास की दिशा में अभी भी सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।
लोक भवन को जनसंवाद और सहभागिता का मंच बनाने का प्रयास
राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने लोक भवन को केवल संवैधानिक और प्रशासनिक संस्था के रूप में नहीं, बल्कि जनता के साथ संवाद, विश्वास और सहभागिता के प्रभावी मंच के रूप में विकसित करने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि समाज के विभिन्न वर्गों, शिक्षाविदों, किसानों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों के साथ नियमित संवाद का क्रम जारी रहा। आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए लोक भवन के द्वार सदैव खुले रहे। राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में अपनी भूमिका का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उनका विशेष ध्यान उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन, विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य तथा विश्वविद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण के निर्माण पर केंद्रित रहा।
उन्होंने सभी कुलपतियों और शिक्षकों से झारखंड को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय उत्कृष्टता का केंद्र बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश ‘विकसित भारत-2047’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है और प्राकृतिक संसाधनों, जनजातीय विरासत तथा युवा शक्ति से समृद्ध झारखंड इस राष्ट्रीय विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। राज्यपाल ने सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग जगत, सामाजिक संगठनों और प्रत्येक नागरिक से विकास के इस संकल्प को साकार करने में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने राज्यहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर मिले सहयोग के लिए राज्य सरकार के प्रति भी आभार व्यक्त किया।
‘संवाद से विश्वास’ पुस्तक का हुआ लोकार्पण
कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव डॉ. नितिन कुलकर्णी ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का सार्वजनिक जीवन सादगी, जनसुलभता, संवादशीलता और संवेदनशीलता का उदाहरण रहा है। उन्होंने कहा कि अपने दीर्घकालिक संसदीय अनुभव के आधार पर राज्यपाल ने पिछले दो वर्षों में शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, विश्वविद्यालयों के सुदृढ़ीकरण और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ सतत संवाद को विशेष प्राथमिकता दी। डॉ. नितिन कुलकर्णी ने कहा कि भवन का नाम भले ही पहले राज भवन था, लेकिन राज्यपाल की जनोन्मुखी और संवेदनशील कार्यशैली ने इसे पहले ही वास्तविक अर्थों में लोक भवन बना दिया था।
उन्होंने बताया कि राज्यपाल के दो वर्षों के कार्यों, विभिन्न पहलों और उपलब्धियों को संकलित करते हुए ‘संवाद से विश्वास’ पुस्तक प्रकाशित की गई है। यह पुस्तक उनके जनोन्मुखी, सक्रिय और संवेदनशील कार्यकाल का दस्तावेज है। रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने कहा कि राज्यपाल-सह-कुलाधिपति की सक्रियता, सकारात्मक सोच और विश्वविद्यालयों के प्रति प्रतिबद्धता शिक्षाविदों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व और सतत प्रोत्साहन से विश्वविद्यालय प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं।
झारखंड खुला विश्वविद्यालय, रांची के कुलपति प्रो. (डॉ.) अभय कुमार सिंह ने राज्यपाल को दो वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के मार्गदर्शन में राज्य में उच्च शिक्षा को नई दिशा मिली है और उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता, अनुसंधान, नवाचार तथा शैक्षणिक संस्थानों के सुदृढ़ीकरण को प्राथमिकता दी है। इस अवसर पर राज्यपाल के दो वर्षों के कार्यकाल की प्रमुख गतिविधियों, जनसेवा के विभिन्न आयामों और झारखंड के साथ उनके आत्मीय जुड़ाव को समाहित करने वाले प्रकाशन ‘संवाद से विश्वास’ का लोकार्पण भी किया गया।




