झारखंड में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी, 1 करोड़ इनामी माओवादी मिसिर बेसरा गिरफ्तार

गिरिडीह। झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के सेंट्रल कमेटी सदस्य और 1 करोड़ के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा को सयुंक्त अभियान के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके साथ

गिरिडीह। झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के सेंट्रल कमेटी सदस्य और 1 करोड़ के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा को सयुंक्त अभियान के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके साथ संगठन के दो सक्रिय सदस्य और दो अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है।

मिसिर बेसरा हमेशा से झारखंड, बिहार, बंगाल और छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए सिरदर्द रहा है। वह नक्सली संगठन के लिए भी काफी खास था। यही कारण है कि जब 2007 में बिहार पुलिस ने मिसिर को गिरफ्तार किया तो संगठन ने पेशी के दरमियान लखीसराय कचहरी पर हमला बोलकर मिसिर को छुड़ा लिया था। यह हमला वर्ष 2009 में किया गया था।

हमले के बाद मिसिर फरार हो गया और उसने अपना ठिकाना बिहार के गया जिले के बांके बाजार को बनाए रखा। चूंकि मिसिर का कार्य क्षेत्र सर्पूण झारखंड एवं झारखंड से सटे बंगाल, छत्तीसगढ़ एवं बांका के अलावा गया का बाराचट्टी भी था। ऐसे में इसी बांके बाजार क्षेत्र से वह संगठन के कार्यों को अंजाम देता रहा।

वैसे 2007 में लखीसराय से गिरफ्तारी से पूर्व मिसिर का नाम कई बड़ी घटनाओं में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर आ चुका है। गिरिडीह शहरी इलाके में होम गार्ड कैंप पर हमला करने और हथियार चोरी करने के मामले में भी उसका नाम चर्चा में रहा था। बताया जाता है कि जहानाबाद जेल ब्रेक के पीछे भी उसकी ही साजिश थी.

गिरफ्तारी से पहले इन घटनाओं में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आया था नाम

मई 2001 – अड़की थानान्तर्गत हेम्ब्रम बाजार में पुलिस गश्ती दल पर हमला कर चार पुलिस राइफल की लूट.

सितंबर 2001 – हजारीबाग जिले के चुरचू थाना अंतर्गत हरली जंगल में CRPF पर हमलाकर बारह जवानों की हत्या और हथियार की लूट।

अक्टूबर 2001 – धनबाद के तोपचांची में जैप आर्म्स पार्टी पर हमला कर तेरह पुलिसकर्मियों की हत्या एवं 18 एसएलआर, 02 स्टेन गन और 01 पिस्टल लूटे गए।

दिसंबर 2002 – पश्चिम सिंहभूम जिले के मनोहरपुर थानान्तर्गत विटकलसोय में पुलिस बल पर हमला कर पुलिसकर्मियों की हत्या और एसएलआर, पुलिस राइफल, रिवाल्वर, पिस्टल एवं ग्रेनेड की लूट।

अप्रैल 2003 – बोकारो जिला में चंद्रपुरा रेल थाना पर हमला कर 23 राइफल, दो स्टेनगन एवं कारतूस की लूट.

मार्च 2004 – पश्चिमी सिंहभूम के बड़ा जामदा ओपी पर हमलाकर हथियार लूट लिए गए थे.

अप्रैल 2004 – पश्चिमी सिंहभूम के गुवा थानान्तर्गत बलिवा में पुलिस बल पर हमला कर 11 एसएलआर, 03 इंसास एवं कारतूस लूटे गए थे।

जून 2004 – खूंटी के रनिया थानान्तर्गत सरवो घाटी में पुलिस गश्ती दल पर हमला कर तीन एसएलआर और कारबाईन की लूट।

जून 2005 – उत्तरी बिहार के मधुबन में थाना, बैंक और प्रखण्ड कार्यालय पर हमला कर पैसे और हथियार की लूट।

जून 2005 – झुमरा, बोकारो स्थित सीआरपी कैंप पर हमला।

नवंबर 2005 – गिरीडीह जिले के होमगार्ड शस्त्रागार पर हमला कर 186 राइफल की लूट.

नवंबर 2005 – जहानाबाद जेल ब्रेक की घटना की योजना बनाने का अहम सहयोगी।

2005 – खैरा पिकेट पर हमले की योजना बनाने वाला।

सुरक्षा ऐसा की परिंदा भी पर नहीं मार सके

झारखंड- बिहार-छतीसगढ़ में सैकड़ों घटनाओं में मिसिर का नाम कारित करने या योजना तैयार करने में आता रहा हैं। ऐसे में यह समझना मुश्किल नहीं हैं कि प्रशांत बोस की गिरफ्तारी के बाद मिसिर को ही संगठन की कमान क्यूं सौंपी गई थी। वैसे मिसिर की सुरक्षा दस्ता भी बतलाता रहा है कि मिसिर सबसे इम्पोर्टेन्ट क्यों था।

दरअसल, इससे पहले जब भी मिसिर से जुड़े हुए नक्सली की गिरफ्तारी हुई तो पुलिस ने सबसे अधिक पूछताछ मिसिर को लेकर ही की थी. बताया जाता है कि पिछली दफा जब संदीप नामक नक्सली धराया था तो उसने पुलिस को यह बताया था कि मिसिर की प्रोटेक्शन टीम कैसे काम करती है। उसने बताया था कि खुद की सुरक्षा के लिए मिसिर अपने पास एके 47 रखता है। वहीं, इसके साथ कभी चलने वाला पिंटू लोहरा इंसास और वॉकी टॉकी रखता है।

इसी तरह मिसिर के दस्ते के पास कई एसएलआर, इंसास, 3 नॉट 3 राइफल, एम-16 जैसे हथियार के साथ महिला-पुरुष नक्सली साथ रहते थे. छतीसगढ़ के भी कई नक्सली मिसिर की सुरक्षा में रहते थे

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