हर-हर बम-बम से गूंंजेंगे शिवालय
रांची। भगवान शिव की आराधना, तप, साधना और भक्ति का पावन महीना श्रावण यानी सावन मास इस वर्ष श्रावण माह की शुरुआत 30 जुलाई दिन गुरुवार से प्रारंभ होकर 28 अगस्त तक रहेगा।सनातन धर्म में सावन को भगवान शिव का सर्वाधिक प्रिय महीना माना गया है। इस पूरे माह में शिवलिंग पर जल, दूध,बेलपत्र,धतूरा,आक-पुष्प आदि अर्पित कर भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की जाती है। सावन के सोमवार का विशेष महत्व है।
श्रद्धालु सोमवार को व्रत रखते हैं,मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं तथा ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप कर सुख, शांति,आरोग्य और समृद्धि की कामना करते हैं।सावन की महिमा का संबंध समुद्र मंथन की प्रसिद्ध पौराणिक कथा से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान सबसे पहले अत्यंत घातक हलाहल विष निकला। उसके प्रभाव से समस्त सृष्टि संकट में पड़ गई। देवताओं और समस्त जीवों की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। विष के कारण उनका कंठ नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए। विष की उष्णता को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव पर जल अर्पित किया। इसी मान्यता से सावन में शिवलिंग पर जलाभिषेक की परंपरा को विशेष महत्व मिला।
सावन केवल धार्मिक आस्था का महीना ही नहीं, बल्कि प्रकृति के नवजीवन का भी प्रतीक है। वर्षा से धरती हरियाली की चादर ओढ़ लेती है।पेड़-पौधों,नदियों और जलस्रोतों में नवचेतना आती है। ऐसे समय में शिव आराधना मनुष्य को प्रकृति के प्रति सम्मान,संयम और संरक्षण का संदेश भी देती है।श्रावण मास के सोमवार को भगवान शिव की पूजा और व्रत का विशेष फलदायी माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और शिव मंदिर में जाकर जलाभिषेक एवं पूजन करते हैं शिव-पार्वती की आराधना, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, रुद्राभिषेक तथा शिव चालीसा का पाठ भी श्रद्धा से किया जाता है।
सावन का वास्तविक उद्देश्य केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। यह माह मन, वचन और कर्म की शुद्धि का संदेश देता है। श्रद्धालुओं को सात्त्विक जीवन, वाणी में मधुरता, जरूरतमंदों की सेवा, गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण तथा परोपकार को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा मिलती है। भगवान शिव का स्वरूप स्वयं त्याग, करुणा,समभाव और लोककल्याण का प्रतीक है।इस प्रकार सावन मास आस्था और अध्यात्म के साथ-साथ प्रकृति, सेवा, संयम और सद्भाव का पर्व है। ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से गूंजते शिवालय और श्रद्धा से किए गए जलाभिषेक भक्तों को यही संदेश देते हैं कि सच्ची शिवभक्ति मानव कल्याण, प्रकृति संरक्षण और परोपकार की भावना में निहित है।
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