जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले में मानसून की रफ्तार फिलहाल सामान्य से कम रहने के कारण धान की खेती करने वाले किसान चिंता और उम्मीद, दोनों के बीच खेती का काम जारी रखे हुए हैं। बारिश की कमी के बावजूद किसानों ने धान रोपनी नहीं छोड़ी है और बेहतर मानसून की आस में खेतों में मेहनत कर रहे हैं। जून महीने में जिले में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई। जहां सामान्य तौर पर 247 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, वहीं कई क्षेत्रों में केवल 50 से 55 मिलीमीटर वर्षा हुई। इसके चलते सूखे जैसी स्थिति बनने लगी और धान की खेती प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई।
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कई प्रखंडों में बढ़ी किसानों की परेशानी
चाकुलिया, घाटशिला, बहरागोड़ा, पटमदा, बोड़ाम, मुसाबनी और पोटका जैसे प्रखंडों में बारिश की कमी का सबसे अधिक असर देखा गया। कई किसानों को ट्यूबवेल और पंपसेट के सहारे खेतों में पानी पहुंचाकर धान की रोपाई करनी पड़ी, जिससे खेती की लागत बढ़ गई। कुछ स्थानों पर धान के बिचड़े भी सूखने की स्थिति में पहुंच गए थे।
जुलाई की बारिश से लौटी उम्मीद
जुलाई के मध्य से जिले के कुछ हिस्सों में हुई बारिश ने किसानों को राहत दी है। जमशेदपुर और आसपास के इलाकों में अच्छी वर्षा के कारण कुछ स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनी, लेकिन खेतों में पर्याप्त नमी लौटने से धान रोपनी का काम फिर से तेज हो गया। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। किसानों का कहना है कि यदि सावन में अच्छी बारिश होती है तो फसल को बड़ा नुकसान होने से बचाया जा सकता है।
कृषि विभाग की सलाह
कृषि विभाग किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली धान की किस्मों और वैकल्पिक फसलों को अपनाने की सलाह दे रहा है। विभाग का मानना है कि बदलते मौसम के बीच ऐसी फसलें किसानों के लिए अधिक लाभकारी साबित हो सकती हैं। फिलहाल पूर्वी सिंहभूम के किसान मौसम की अनिश्चितता के बावजूद मेहनत और उम्मीद के साथ खेती में जुटे हुए हैं।




