अयोध्या : राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दान व्यवस्था और बैंकिंग सिस्टम में बड़े बदलाव किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब मंदिर के बैंक खातों का संचालन एक व्यक्ति के बजाय तीन अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा। इसके साथ ही दान पेटियों की निगरानी और नकदी की गिनती की प्रक्रिया को भी अधिक सुरक्षित बनाया गया है।
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ट्रस्ट ने कार्यकारी महासचिव कृष्ण मोहन के साथ जगदीश और चंदन राय को भी बैंक खातों के संचालन के लिए अधिकृत किया है। अब किसी भी वित्तीय लेनदेन के लिए तीनों के संयुक्त हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। इससे पहले बैंकिंग व्यवस्था की जिम्मेदारी ट्रस्टी अनिल मिश्रा के पास थी, जबकि कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी के डिजिटल हस्ताक्षरों का उपयोग किया जाता था।
दान व्यवस्था में बढ़ाई गई सुरक्षा
दान की गिनती की पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को मजबूत किया गया है। अब दान गणना स्थल पर 43 लोगों की मौजूदगी रहेगी। इसके अलावा 13 नए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और जिन स्थानों पर पहले कैमरे नहीं थे, वहां भी निगरानी की व्यवस्था की गई है। ट्रस्ट के अनुसार, दान पेटियों से नकदी को गणना स्थल तक पहुंचाने के लिए 27 एसआईएस सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती भी की जाएगी। विशेष रूप से पिलर नंबर 34 के पास तीन अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को लगाया जाएगा, जहां गुप्त दान पेटी रखी गई है।
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जांच में फर्जी रसीद का खुलासा
जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में फर्जी रसीदों के इस्तेमाल का भी खुलासा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, आरोपी श्रद्धालुओं से सीधे दान लेकर उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के नाम से छपी फर्जी रसीद देते थे। जांच एजेंसियों को ऐसी पुरानी रसीद बुक भी मिली है, जिस पर ट्रस्ट का लोगो छपा हुआ था। सूत्रों के मुताबिक, ऑनलाइन रसीद व्यवस्था लागू होने के बाद कागजी फर्जी रसीदों का इस्तेमाल बंद कर दिया गया था, क्योंकि श्रद्धालु अधिकृत बैंक खाते या अधिकृत दान काउंटर के माध्यम से दान देने लगे थे।
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इस्तीफों को लेकर भी सामने आई जानकारी
सूत्रों के अनुसार, चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों के पीछे ट्रस्ट के नियमों से जुड़ा प्रावधान भी एक कारण माना जा रहा है। ट्रस्ट के नियमों में किसी पदाधिकारी या ट्रस्टी के दोषी पाए जाने पर उसे दो-तिहाई बहुमत से पद से हटाने का प्रावधान है। हालांकि, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी पहले ही सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि दोनों ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया था। फिलहाल मामले की जांच जारी है और एजेंसियां गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही हैं। ट्रस्ट का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य दान संग्रह और बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
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