अहमदाबाद : गुजरात हाईकोर्ट ने मंगलवार को वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में स्पेशल कोर्ट के 2022 के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने 38 दोषियों को सुनाई गई मौत की सजा और 11 अन्य को दी गई उम्रकैद की सजा को कायम रखते हुए दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ दायर सभी अपीलों को खारिज कर दिया। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने विस्फोट में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों और घायलों को मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।
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मृतकों के परिजनों और घायलों को मिलेगा मुआवजा
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि धमाकों में जान गंवाने वाले 56 लोगों के आश्रितों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। वहीं, 200 से अधिक घायलों में अति गंभीर रूप से घायल लोगों को 5-5 लाख रुपये और सामान्य रूप से घायल पीड़ितों को 1-1 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुआवजा राशि का भुगतान 31 मार्च 2027 तक हर हाल में पूरा किया जाए।
70 मिनट में 21 धमाकों से दहल गया था अहमदाबाद
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद शहर में महज 70 मिनट के भीतर 21 स्थानों पर सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन विस्फोटों में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। हमलावरों ने अस्पतालों को भी निशाना बनाया था, जिससे हताहतों की संख्या और बढ़ गई थी। जांच में इस हमले के पीछे आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन का नाम सामने आया था।
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ट्रायल कोर्ट के फैसले पर हाईकोर्ट की मुहर
फरवरी 2022 में स्पेशल कोर्ट ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी का मानते हुए 38 दोषियों को मौत की सजा और 11 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अब जस्टिस ए.वाई. कोगजे और जस्टिस समीर दवे की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए सभी अपीलें खारिज कर दी हैं। इसके साथ ही देश के सबसे बड़े आतंकी मामलों में से एक में दोषियों की सजा पर अंतिम रूप से हाईकोर्ट की मुहर लग गई।
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