रांची: एमपी/एमएलए के मुकदमे में सीबीआई की सुस्ती पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कठोर टिप्पणी की है। एकीकृत बिहार में हुए अलकतरा घोटाले के 32 अभियुक्तों में से 12 की ट्रायल के दौरान मौत होने और 20 खिलाफ अब तक ट्रायल चलते रहने की जानकारी के बाद न्यायालय ने अपनी नाराजगी का इजहार किया। अदालत ने ट्रायल कोर्ट से दो मुकदमों का रिकार्ड मंगाने का आदेश दिया।
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हाईकोर्ट के न्यायाधीश रंगन मुखोपाध्याय की पीठ में एमपी/एमएलए से जुड़े मुकदमे की सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने एमपी/एमएलए के खिलाफ चल रहे मुकदमों को तेजी से निपटाने का आदेश दिया है। लेकिन राज्य में इनके खिलाफ अनेक मामले में अभी ट्रायल ही चल रहा है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को इस बात की जानकारी मिली कि वर्ष 1997 में एकीकृत बिहार के समय ही अलकतरा घोटाला हुआ था। सीबीआई ने अलकतरा घोटाले की जांच के बाद कुल 32 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है। आरोपितों की सूची में तत्कालीन मंत्री इलियास हुसैन भी शामिल है।
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सुनवाई के दौरान कोर्ट को इस बात की जानकारी मिली कि अलकतरा के 32 में से 12 अभियुक्तों की ट्रायल के दौरान ही मौत हो चुकी है। बाकी अभियुक्तों के खिलाफ अभी ट्रायल चल रहा है। इस बात की जानकारी मिलने के बाद कोर्ट ने सीबीआई की ओर से बरती गयी सुस्ती पर नाराजगी जताई और टिप्पणी की।
न्यायालय ने कहा कि सीबीआई दस्तावेज इकट्ठा करने में पूरा समय निकाल देती ह।. ट्रायल के दौरान गवाहों को कोर्ट में पेश करने में तेजी नहीं दिखाती। कोर्ट ने एमपी/एमएलए से जुड़े चल रहे 11 मामलों मे से दो मामलों का रिकार्ड निचली अदालत से मंगाने का आदेश दिया। सीबीआई की ओर से कोर्ट को इस बात की जानकारी दी गय़ी कि MP/MLA से जुड़े कई मामलों के गवाह अपने पते पर नहीं मिल रहे हैं।
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