झारखंडी भाषाओं की अनदेखी बर्दाश्त नहीं, भाजपा ने उठाए सवाल

रांची : झारखंड में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और विकास को लेकर भाजपा ने राज्य सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अविनेश कुमार ने कहा कि झारखंड की पहचान यहां की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं, संस्कृति

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BJP प्रदेश प्रवक्ता अविनेश कुमार (फाइल फोटो)

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रांची : झारखंड में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और विकास को लेकर भाजपा ने राज्य सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अविनेश कुमार ने कहा कि झारखंड की पहचान यहां की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं, संस्कृति और परंपराओं से है। ऐसे में इन भाषाओं को बचाने और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सरकार की है। उन्होंने कहा कि जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाओ मोर्चा जिस तरह अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है, उससे भाषा संरक्षण को लेकर समाज की चिंता स्पष्ट होती है। सरकार को आंदोलनकारियों की आवाज गंभीरता से सुननी चाहिए।

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झारखंडी भाषाओं के संरक्षण की मांग

अविनेश कुमार ने कहा कि संथाली, मुंडारी, हो, कुड़ुख, खड़िया, नागपुरी, खोरठा, कुरमाली और पंचपरगनिया झारखंड की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन भाषाओं का संरक्षण केवल भाषाई विषय नहीं, बल्कि आदिवासी-मूलवासी अस्मिता और आने वाली पीढ़ियों की पहचान से जुड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि भाषाओं के विकास के लिए संस्थागत व्यवस्था और ठोस पहल की जरूरत है। इसके लिए राज्य सरकार को गंभीरता से काम करना चाहिए।

भाषा अकादमी और मातृभाषा में पढ़ाई की मांग

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाओ मोर्चा की मांगें स्पष्ट हैं। राज्य में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा अकादमी की स्थापना होनी चाहिए। प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक मातृभाषा में पढ़ाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने विभिन्न भाषाओं के स्वीकृत और रिक्त शिक्षक पदों पर नियुक्ति की मांग भी की। इससे बच्चों को अपनी मातृभाषा में शिक्षा मिल सकेगी। इसके अलावा प्रत्येक भाषा के विकास के लिए अलग बजट का प्रावधान करने और साहित्यकारों, कवियों, लेखकों तथा लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए ठोस योजना बनाने की मांग की।

विश्वविद्यालयों में पढ़ाई और शोध की बेहतर व्यवस्था पर जोर

अविनेश कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई और शोध की बेहतर व्यवस्था जरूरी है। लोकगीत, लोककथाओं और पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने के लिए उनका दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक गतिविधियों में भी झारखंडी भाषाओं को स्थान मिलना चाहिए।

सरकार से समयबद्ध कार्ययोजना बनाने की मांग

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाओ मोर्चा की मांगों का समर्थन करती है। उन्होंने सरकार से केवल आश्वासन देने के बजाय समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि झारखंड गठन के पीछे भाषा, संस्कृति और पहचान के संरक्षण का भी उद्देश्य रहा है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इन मांगों पर गंभीरता से निर्णय ले। अविनेश कुमार ने कहा कि भाषा बचाओ आंदोलन को लेकर सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदम ही तय करेंगे कि आंदोलनकारियों को उनका अधिकार कब तक मिल पाता है।

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