नई दिल्ली : ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने 10 हजार रुपये का शांति बॉन्ड भरने से साफ इनकार कर दिया है। नेहा का कहना है कि वह किसी भी तरह का बॉन्ड साइन नहीं करेंगी और इसके लिए उनकी कोई शर्त भी नहीं है। उनका यह बयान दिल्ली हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद सामने आया है। दरअसल, नेहा बोरा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 130 के तहत जारी नोटिस को कोर्ट में चुनौती दी थी। नोटिस में कहा गया था कि जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए उन्हें 10 हजार रुपये का बॉन्ड भरना होगा और साथ में एक जमानतदार भी देना होगा। लेकिन नेहा बोरा ने बॉन्ड भरने से साफ मना कर दिया है।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
बीते शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने नेहा बोरा की याचिका पर फैसला सुनाते हुए उसे खारिज कर दिया। उन्होंने एसईएम कोर्ट की ओर से जारी उस नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने की शर्त रखी गई थी। मामले में गुरुवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद शुक्रवार को अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
16 अक्टूबर को मंडी हाउस से हिरासत में लिया गया था
नेहा बोरा के मुताबिक, 16 अक्टूबर को उन्हें मंडी हाउस में एक सभा में शामिल होने के दौरान हिरासत में लिया गया था। उनका आरोप है कि पुलिस उन्हें एक अज्ञात स्थान पर ले गई और आरके पुरम थाने में रातभर रखा गया। अगले दिन सुबह छह बजे उन्हें रिहा किया गया।
नोटिस में क्या लगाए गए आरोप?
जारी नोटिस में मंडी हाउस पर नारेबाजी करने, निषेधाज्ञा के बावजूद जंतर-मंतर के आसपास विरोध प्रदर्शन करने और कनॉट प्लेस में प्रदर्शन के लिए लोगों को उकसाने के आरोप लगाए गए हैं। नेहा बोरा ने अपनी याचिका में कहा था कि नोटिस में शांति भंग होने की आशंका के समर्थन में कोई ठोस वजह नहीं बताई गई। उनके मुताबिक, नोटिस में किसी विशिष्ट घटना या समयावधि का भी जिक्र नहीं किया गया था। हाईकोर्ट ने उनकी इस याचिका को खारिज कर दिया है।




