नॉर्थ उरीमारी ओपन-कास्ट कोयला खदान को माइनिंग टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित 2,500 रुपये खर्च करें और देखें कोयला खदान का रोमांच

रांची: झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित नॉर्थ उरीमारी ओपन-कास्ट कोयला खदान को माइनिंग टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित किया गया है। यहां पर्यटक गाइड की मदद से सक्रिय खदान में कोयला निकालने की प्रक्रिया और तय समय पर होने वाली लाइव ब्लास्टिंग को

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रांची:  झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित नॉर्थ उरीमारी ओपन-कास्ट कोयला खदान को माइनिंग टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित किया गया है। यहां पर्यटक गाइड की मदद से सक्रिय खदान में कोयला निकालने की प्रक्रिया और तय समय पर होने वाली लाइव ब्लास्टिंग को करीब से देख सकते हैं।
झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित नॉर्थ उरीमारी ओपन-कास्ट कोयला खदान देश का पहला ऐसा सक्रिय खनन स्थल बन गया है, जहां पर्यटकों को कोयला निकालने की प्रक्रिया और लाइव ब्लास्टिंग को करीब से देखने का मौका मिल रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की इस पहल के तहत अब आम लोग सक्रिय खदान में जाकर खनन से जुड़े कामकाज का प्रत्यक्ष अनुभव ले सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य खनन क्षेत्र को पर्यटन से जोड़ना और लोगों को कोयला उत्पादन की प्रक्रिया से रूबरू कराना है।

2,500 रुपये में गाइड टूर, जीएसटी देना होगा अलग

उरीमारी खदान के इस अनोखे टूर की शुरुआत राजधानी रांची से होती है। पर्यटकों को वाहनों से खदान तक ले जाया जाता है। रास्ते में पड़ने वाली पतरातू घाटी में उनके भोजन और विश्राम की व्यवस्था की गई है। खदान परिसर में पहुंचने पर सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) के गाइड और कर्मचारी पर्यटकों के साथ रहते हैं। वे उन्हें खनन की पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हैं। पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ब्लास्टिंग का समय पहले से तय किया जाता है। इस गाइड टूर के लिए प्रति व्यक्ति 2,500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके अलावा जीएसटी भी देना होगा। इच्छुक पर्यटक झारखंड पर्यटन विकास निगम की वेबसाइट के माध्यम से बुकिंग कर सकते हैं। अब तक केरल, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों से पर्यटक इस यात्रा के लिए बुकिंग करा चुके हैं।

स्पेन दौरे से मिली माइनिंग टूरिज्म की प्रेरणा

झारखंड में माइनिंग टूरिज्म की शुरुआत की योजना अप्रैल 2025 में बनी थी। उस समय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पेन यात्रा के दौरान बार्सिलोना के पास स्थित गावा म्यूजियम ऑफ माइंस का दौरा किया था। वहां उन्होंने देखा कि किस तरह खनन से जुड़े इतिहास और स्थलों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। इससे प्रेरणा लेकर 21 जुलाई 2025 को झारखंड पर्यटन विकास निगम और सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के बीच पांच साल का समझौता हुआ। इसके बाद सितंबर 2025 में पर्यटकों का पहला समूह उरीमारी कोयला खदान का भ्रमण करने पहुंचा।

दुनिया में लोकप्रिय है माइनिंग टूरिज्म

दुनिया के कई देशों में माइनिंग टूरिज्म लोकप्रिय है। पोलैंड की गुइडो कोल माइंड में वर्ष 2024 के दौरान करीब 2.5 लाख पर्यटक पहुंचे थे। इसके मुकाबले उरीमारी खदान में अब तक केवल 12 से 13 पर्यटक समूहों के दौरे दर्ज किए गए हैं। झारखंड में पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं के बीच माइनिंग टूरिज्म को एक नए विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, झारखंड में घरेलू पर्यटकों की संख्या वर्ष 2022 में 3.83 करोड़ थी, जो वर्ष 2024 में बढ़कर 5.40 करोड़ हो गई।

दूसरी खदानों को भी पर्यटन से जोड़ने की तैयारी

राज्य सरकार अब भारत कोकिंग कोल लिमिटेड के साथ मिलकर एक अन्य माइनिंग टूरिज्म सर्किट विकसित करने पर काम कर रही है। इसके अलावा, तांबे की खदानों और आमंदी खदानों को भी पर्यटकों के लिए खोलने की योजना है। इसके लिए टाटा स्टील के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
इन पहलों के जरिए झारखंड के खनन क्षेत्रों को पर्यटन से जोड़ने और राज्य में घूमने के नए विकल्प विकसित करने की कोशिश की जा रही है। उरीमारी खदान में शुरू हुई यह पहल आने वाले समय में राज्य के पर्यटन क्षेत्र के लिए एक नया रास्ता खोल सकती है।

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