रांची: कोयला कंपनियों के कर्मचारियों के भविष्य निधि (PF) की रकम के निवेश से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को जांच का आदेश दिया है। कोल माइन्स प्रॉविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (CMPFO) की ओर से दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (DHFL) में निवेश किए गए 1,300 करोड़ रुपये में से 727.67 करोड़ रुपये के नुकसान का मामला सामने आया था। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कोल एम्प्लॉयी वेलफेयर एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान गुरुवार को यह आदेश दिया। अदालत ने आदेश के साथ याचिका का निष्पादन कर दिया।
DHFL में निवेश के बाद डूबे 727.67 करोड़ रुपये
यह मामला CMPFO की ओर से DHFL में किए गए निवेश से जुड़ा है। संगठन ने कंपनी में कुल 1,300 करोड़ रुपये निवेश किए थे। बाद में DHFL दिवालिया हो गई, जिसके चलते निवेश की रकम में से 727.67 करोड़ रुपये डूब गए।
इस मामले को लेकर कोयला कंपनियों के कर्मचारियों के संगठन ने जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि DHFL की आर्थिक स्थिति खराब होने की जानकारी मिलने के बावजूद निवेश की रकम समय रहते वापस निकालने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
SBI और UTI ने दी थी चेतावनी
याचिका के मुताबिक, CMPFO के फंड मैनेजर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और UTI ने 24 जून 2019 को ही DHFL की आर्थिक स्थिति को लेकर चेतावनी दी थी। उन्होंने कंपनी की वित्तीय स्थिति बिगड़ने की आशंका जताते हुए निवेश की रकम निकालने की सलाह दी थी।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि चेतावनी के बावजूद समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए। इसके बाद DHFL दिवालिया हो गई और CMPFO को 727.67 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
दिसंबर 2019 में रकम निकालने का प्रस्ताव
मामले से संबंधित जानकारी के अनुसार, 20 दिसंबर 2019 को CMPFO की बैठक हुई थी। इस बैठक में DHFL से निवेश की रकम वापस निकालने का प्रस्ताव पारित किया गया। हालांकि, तब तक निवेश में हुए नुकसान की स्थिति सामने आ चुकी थी।
याचिका में सवाल उठाया गया कि जब जून 2019 में ही कंपनी की आर्थिक स्थिति को लेकर चेतावनी मिल गई थी, तो निवेश की रकम को सुरक्षित रखने के लिए समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
727.67 करोड़ रुपये को बट्टे खाते में डालने का प्रस्ताव
22 नवंबर 2021 को CMPFO के बोर्ड की निवेश संबंधी उपसमिति की बैठक हुई थी। याचिका के मुताबिक, इस बैठक में 727.67 करोड़ रुपये को बट्टे खाते में डालने का प्रस्ताव रखा गया। हालांकि, कर्मचारियों ने इसका विरोध किया।
निवेश में हुए नुकसान की भरपाई को लेकर कोल इंडिया के निदेशक मंडल ने कोयला उत्पादन पर प्रति टन 10 रुपये का उपकर लगाने का प्रस्ताव भी रखा था। इस घटनाक्रम के बाद कर्मचारियों के PF की रकम के नुकसान और उसकी भरपाई को लेकर सवाल उठे।
तत्कालीन कोयला सचिव के खिलाफ हुई थी विभागीय कार्रवाई
इस मामले में तत्कालीन कोयला सचिव अनिमेष भारती के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी हुई थी। याचिका में कहा गया कि विभागीय कार्रवाई की रिपोर्ट आने से पहले ही CMPFO की ओर से हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया गया था। इसमें CMPFO के अधिकारियों को मामले में दोषमुक्त बताया गया था।
याचिकाकर्ता ने पूरे मामले की CBI जांच कराने और डूबी हुई 727.67 करोड़ रुपये की राशि की भरपाई कराने की मांग की थी। अदालत में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनिल कुमार सिंह ने पक्ष रखा।




