रांची: बीरला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी), मेसरा के प्रबंधन अध्ययन विभाग द्वारा आज कैट हॉल में जेंडर संवेदीकरण” विषय पर एक प्रभावशाली कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों और संकाय सदस्यों के बीच एक समावेशी, समतामूलक और संवेदनशील शैक्षणिक वातावरण को बढ़ावा देना था।
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इस कार्यशाला के अध्यक्ष प्रबंधन अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कुमार संजय सावर्णि थे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. श्रद्धा शिवानी उपस्थित रहीं, जबकि विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. सुजाता प्रियंवदा दास ने कार्यक्रम की समन्वयक की भूमिका निभाई।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता रांची के देवनेट एनजीओ के सह-संस्थापक एवं निदेशक श्याम कुमार थे। सामुदायिक विकास और सामाजिक नीतियों में अपने व्यापक अनुभव के आधार पर उन्होंने लैंगिक समानता, सामाजिक दृष्टिकोण और संस्थागत जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर एक संवादमूलक सत्र का संचालन किया।
कार्यशाला में चर्चा किए गए मुख्य बिंदु एवं आवश्यक विषय ये रहे
– लिंग और जेंडर में अंतर: जैविक भिन्नता और समाज द्वारा तय की गई लैंगिक भूमिकाओं, अपेक्षाओं और सामाजिक संरचनाओं के बीच के अंतर को स्पष्ट करना।
– अचेतन पूर्वाग्रह और सूक्ष्म भेदभाव: दैनिक बातचीत, सहकर्मियों के व्यवहार और पेशेवर निर्णयों में अनजाने में होने वाले पक्षपात और रूढ़िवादिता की पहचान करना।
– कानूनी रूपरेखा और संस्थागत सुरक्षा उपाय: कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम संबंधी पॉश अधिनियम (2013), आंतरिक शिकायत समिति की कार्यप्रणाली और शिकायत निवारण प्रक्रियाओं पर विस्तृत जानकारी।
– कार्यस्थल पर विविधता, समानता और समावेशन: समान अवसर, करियर में निष्पक्ष प्रगति, ‘ग्लास सीलिंग’ को तोड़ने और व्यवस्थित लैंगिक असमानताओं को समाप्त करने पर विचार।
– जेंडर-तटस्थ भाषा एवं समावेशी संवाद: मौखिक, लिखित और आधिकारिक संचार में निष्पक्ष, सम्मानजनक और गैर-भेदभावपूर्ण भाषा के उपयोग को बढ़ावा देना।
– सक्रिय हस्तक्षेप और सहयोग: प्रतिभागियों को ऐसे तरीके सिखाना जिससे वे किसी भी भेदभाव या उत्पीड़न की स्थिति में सुरक्षित रूप से पीड़ित का सहयोग कर सकें और गलत व्यवहार का विरोध कर सकें।
– मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण: इस बात पर जोर देना कि कठोर लैंगिक रूढ़िवादिता हर वर्ग के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है, और संवेदीकरण से आपसी सम्मान व मनोवैज्ञानिक सुरक्षा का माहौल बनता है।
कार्यशाला का समापन एक संवादात्मक प्रश्नोत्तरी सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने व्यावहारिक केस स्टडीज पर विचार साझा किए। अंत में, कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुजाता प्रियंवदा दास द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।




