हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में महिला से दुष्कर्म का मामला, तीन पुलिसकर्मियों पर FIR

रांची: हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में रह रही एक महिला कैदी के साथ दुष्कर्म के मामले में तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। तीनों पुलिसकर्मियों को निलंबित भी कर दिया गया है। सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान राज्य

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रांची: हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में रह रही एक महिला कैदी के साथ दुष्कर्म के मामले में तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। तीनों पुलिसकर्मियों को निलंबित भी कर दिया गया है। सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने यह जानकारी अदालत को दी। वहीं, DLSA की ओर से दाखिल सीलबंद रिपोर्ट में भी महिला के साथ तीन पुलिसकर्मियों द्वारा दुष्कर्म किए जाने का उल्लेख किया गया है।
मामले की दोपहर 2:15 बजे हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने महिला को बांग्लादेश भेजे जाने से जुड़े मामले में केंद्र सरकार से भी जवाब मांगा। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि महिला को बांग्लादेश भेजने के लिए वर्ष 2023 से केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) को पत्र भेजे जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।

केंद्र सरकार से जवाब दाखिल करने का निर्देश

राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी के बाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता को महिला को बांग्लादेश भेजे जाने के मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
राज्य सरकार ने शपथ पत्र के माध्यम से अदालत को बताया कि महिला से दुष्कर्म के आरोप में तीन कांस्टेबलों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और तीनों को निलंबित कर दिया गया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने प्राथमिकी में लगाई गई भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं को लेकर भी राज्य सरकार से सवाल किया। इस पर राज्य के महाधिवक्ता रोहित राय ने अदालत को बताया कि प्राथमिकी में आवश्यक संशोधन किया जाएगा।

डिटेंशन सेंटर में महिला को सुविधाएं देने का निर्देश

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि डिटेंशन सेंटर में रहने के दौरान महिला को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इस दौरान DLSA की ओर से महिला के साथ कथित दुष्कर्म से संबंधित सीलबंद रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट में तीन पुलिसकर्मियों द्वारा महिला के साथ दुष्कर्म किए जाने की बात का उल्लेख किया गया है। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को निर्धारित की है। साथ ही प्रार्थी को राज्य सरकार की ओर से दाखिल जवाब पर अपना प्रतिउत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

महिला को बांग्लादेश क्यों नहीं भेजा गया? कोर्ट ने पूछे सवाल

इससे पहले सोमवार सुबह हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने महिला को लेकर सरकार से कई सवाल किए। अदालत ने मौखिक रूप से पूछा कि यदि महिला को वर्ष 2021 में विदेशी नागरिक माना गया था और उसे विदेशी अधिनियम के तहत तीन साल की सजा मिली थी, तो उसे उसी समय देश से बाहर क्यों नहीं भेजा गया और हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में क्यों रखा गया?
अदालत ने यह भी सवाल किया कि वर्ष 2025 में महिला के खिलाफ विदेशी अधिनियम के तहत दोबारा मामला क्यों दर्ज किया गया और वर्ष 2026 में उस मामले में उसके बरी होने के बाद सरकार की ओर से अपील क्यों नहीं की गई।
कोर्ट के सवालों पर सुनवाई में मौजूद गृह सचिव ने बताया कि महिला को बांग्लादेश भेजने के लिए उस समय ही बांग्लादेश सरकार से संपर्क किया गया था, लेकिन वहां से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
महाधिवक्ता रोहित राय ने सरकार से आवश्यक निर्देश लेने के लिए अदालत से समय मांगा। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की दोपहर 2:15 बजे दोबारा सुनवाई निर्धारित की।

2018 से महिला के खिलाफ दर्ज हैं मामले

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि महिला के खिलाफ वर्ष 2018 में दो मामले दर्ज किए गए थे। इनमें एक बच्चा अपहरण और चोरी से संबंधित था, जबकि दूसरा विदेशी अधिनियम से जुड़ा मामला था। बच्चा अपहरण और चोरी से जुड़े मामले में महिला को दो साल की सजा हुई थी। वहीं, वर्ष 2021 में विदेशी अधिनियम के मामले में उसे तीन साल की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद उसे हजारीबाग डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया।
सरकार के अनुसार, महिला वर्ष 2025 के अंत में डिटेंशन सेंटर से भाग गई थी। इसके बाद उसके खिलाफ विदेशी अधिनियम के तहत एक और मामला दर्ज किया गया, जिसमें वर्ष 2026 में उसे बरी कर दिया गया। मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अंकित अपूर्वा ने पक्ष रखा।

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