झारखंड में डॉक्टरों की नियुक्ति, प्रमोशन और सेवा शर्तों को लेकर झारखंड स्वास्थ्य सेवा संघ (झासा) ने आंदोलन का ऐलान किया है। रविवार को हुई जनरल बॉडी मीटिंग में डॉक्टरों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक के बाद झासा ने कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो 5 अक्टूबर से चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसके बाद भी मांगें पूरी नहीं हुईं तो अनिश्चितकालीन धरना और आगे कार्य बहिष्कार का फैसला लिया जा सकता है।
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झासा के सचिव डॉक्टर मृत्युंजय ठाकुर ने कहा कि बैठक में तीन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई. इनमें संविदा के आधार पर डॉक्टरों की नियुक्ति, डायनेमिक ACP और JPSC के माध्यम से रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति शामिल है। उन्होंने कहा कि पिछले महीने संविदा आधारित चिकित्सा नियुक्ति को लेकर नामावली तैयार की गई है, जिसका संघ विरोध कर रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य में डॉक्टरों के रिक्त पदों को JPSC के माध्यम से नियमित नियुक्ति के जरिए भरा जाना चाहिए। लगातार संविदा के आधार पर डॉक्टरों की नियुक्ति करना स्थायी समाधान नहीं है। झासा की मांग है कि राज्य के योग्य MBBS और विशेषज्ञ डॉक्टरों को नियमित नियुक्ति का अवसर दिया जाए।
डायनेमिक ACP को लेकर डॉक्टरों की मांग
मृत्युंजय ठाकुर ने कहा कि डॉक्टरों को केंद्र और बिहार की तर्ज पर डायनेमिक ACP का लाभ मिलना चाहिए। डॉक्टरों के मुताबिक डायनेमिक ACP ऐसी व्यवस्था है, जिसमें डॉक्टरों को सेवा अवधि के आधार पर समयबद्ध करियर प्रोग्रेशन और वित्तीय उन्नयन का लाभ मिलता है।
झासा का कहना है कि डॉक्टरों के प्रमोशन और करियर प्रोग्रेशन को स्पष्ट और समयबद्ध किया जाना जरूरी है। केंद्र सरकार की व्यवस्था में डॉक्टरों के लिए समयबद्ध करियर प्रोग्रेशन का प्रावधान रहा है। वहीं बिहार में भी स्वास्थ्य सेवा के डॉक्टरों के लिए Dynamic ACP की व्यवस्था लागू है। बिहार हेल्थ सर्विस रूल्स में 6, 12 और 18 वर्ष की सेवा के आधार पर वित्तीय प्रगति का प्रावधान है। झासा चाहता है कि झारखंड में भी डॉक्टरों को प्रभावी और समयबद्ध करियर प्रोग्रेशन का लाभ मिले।
5 अक्टूबर से चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
झासा सचिव ने कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया तो 5 अक्टूबर से चरणबद्ध तरीके से आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसके बाद भी सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई तो संघ अनिश्चितकालीन धरने पर जाने का फैसला लेगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति पैदा होने पर इसकी जिम्मेदारी सरकार और विभाग की होगी।
22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की चेतावनी
वहीं डॉक्टर बिमलेश सिंह ने कहा कि राज्य में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों से वर्ष 2015 से काम लिया जा रहा है, लेकिन उनके लिए अब तक स्पष्ट नियमावली नहीं बनाई गई है। उन्होंने कहा कि राज्य के MBBS डॉक्टरों की नियुक्ति करने के बजाय बाहर से डॉक्टरों को लाने की बात की जा रही है। डॉक्टर बिमलेश सिंह ने कहा कि डायनेमिक ACP के मुद्दे पर डॉक्टरों ने बड़ा फैसला लिया है। अगर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 22 अक्टूबर से राज्यभर के डॉक्टर पूरी तरह कार्य बहिष्कार करेंगे। उन्होंने कहा कि कार्य बहिष्कार जैसी स्थिति पैदा होने के लिए राज्य सरकार खुद जिम्मेदार होगी।
बाहर से डॉक्टर लाने पर भी सवाल
डॉक्टर बिमलेश सिंह ने राज्य के बाहर से डॉक्टरों को लाने की योजना पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि झारखंड की भौगोलिक और प्रशासनिक परिस्थितियां अलग हैं। ऐसे में दूसरे राज्यों से डॉक्टर लाकर यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था को किस तरह मजबूत किया जाएगा, यह समझ से परे है।
“बिहार में समय पर प्रमोशन मिलने से डॉक्टर जा रहे वहां”
डॉक्टर अजीत कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी होने वाले नोटिफिकेशन को लेकर लगातार अलग-अलग स्थितियां सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले डॉक्टरों की नियुक्ति की जाती है और बाद में उन्हें हटाने की स्थिति बनती है। अब केरल से डॉक्टरों को लाने की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि कई ऐसे डॉक्टर भी हैं, जिन्होंने उनके साथ सदर अस्पताल में ज्वाइन किया था, लेकिन बाद में नौकरी छोड़कर बिहार में ज्वाइन कर लिया।
उनके मुताबिक बिहार में डॉक्टरों को समय पर प्रमोशन मिलता है और वहां डॉक्टरों को अपनी सेवा शर्तों के लिए इस तरह संघर्ष नहीं करना पड़ता। झासा ने साफ किया है कि डॉक्टरों की नियुक्ति, प्रमोशन और सेवा शर्तों को लेकर सरकार को जल्द ठोस फैसला लेना होगा। संघ का कहना है कि अगर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर राज्यव्यापी कार्य बहिष्कार भी किया जाएगा।
बिहार हेल्थ सर्विस के नियमों में Dynamic ACP का स्पष्ट प्रावधान है. Bihar Health Service Rules, 2013 के Rule 25 के अनुसार डॉक्टरों को पहली वित्तीय प्रगति और पद की बढ़ोतरी का लाभ 6 वर्ष की सेवा पूरी होने पर दिया जाता है। इसके बाद दूसरी और तीसरी वित्तीय प्रगति भी प्रत्येक 6 वर्ष के अंतराल पर देने का प्रावधान है। यानी सामान्य रूप से यह व्यवस्था 6, 12 और 18 वर्ष के सेवा चरणों से जुड़ी है। बिहार के नियमों में Dynamic ACP के लिए Departmental Promotion Committee की सिफारिश, सेवा रिकॉर्ड और विजिलेंस क्लियरेंस जैसे मानदंड भी जुड़े हैं।









