रांची : दिगम्बर जैन आचार्य 108 श्री ज्ञेयसागर जी महाराज और मुनिश्री नियोग सागर जी महाराज संघ के पावन सानिध्य में दशलक्षण महापर्व (पर्युषण पर्व) का शुभारंभ हुआ। पर्व के प्रथम दिवस पर ‘उत्तम क्षमा धर्म’ पर विशेष मंगल प्रवचन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। सभा को संबोधित करते हुए पूज्य मुनिश्री नियोग सागर जी महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में चारों तरफ अशांति और कटुता का मुख्य कारण भीतर बढ़ती क्रोध व प्रतिशोध की भावना है। उन्होंने रेखांकित किया कि “वस्तु का स्वभाव ही धर्म है।” क्रोध आत्मा का स्वभाव नहीं बल्कि एक विकार है, जबकि क्षमा, शांति और करुणा आत्मा के वास्तविक गुण हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अंगारा फेंकने पर पहले स्वयं का हाथ जलता है, उसी तरह क्रोध दूसरों से पहले अपनी ही शांति का नाश करता है।
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मंदिरों में हुई विशेष पूजा-अर्चना और शांतिधारा
पर्युषण पर्व के पहले दिन राजधानी रांची स्थित दिगम्बर जैन मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। अपर बाजार स्थित जैन मंदिर के बड़े हॉल में विद्वान पंडित प्रदीप जी शास्त्री ‘पीयूष’ के सानिध्य में संगीतमय तरीके से वाद्य यंत्रों के साथ सामूहिक पूजन, शास्त्र वाचन और मंडल पूजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर पवन कुमार रोहित कुमार बाकलीवाल परिवार तथा सुनील कुमार अनिल जी चांदूवाल परिवार द्वारा अपर बाजार मंदिर में शांतिधारा की गई। वहीं, वासुपूज्य जिनालय में प्रदीप कुमार प्रतीक कुमार छाबड़ा परिवार एवं सुचित्रा देवी कोमल सुमीत जी पाटनी परिवार द्वारा शांतिधारा संपन्न कराई गई।
जिनवाणी पाठ प्रतियोगिता में बच्चों ने बिखेरी प्रतिभा
संगीतमय पूजन और धार्मिक अनुष्ठान हेमंत सेठी, आकाश सेठी, संजय पाटनी, राकेश काशलीवाल, प्रमोद झांझरी, संजय काशलीवाल, विनोद झांझरी, कमल पाटोदी, सुनील सेठी और जैन समाज के मंत्री जितेंद्र छाबड़ा की उपस्थिति में संपन्न हुए। संध्या आरती के पश्चात पंडित प्रदीप जी शास्त्री ने क्षमा धर्म पर व्याख्यान दिया। इसके अतिरिक्त, ‘जैन युवा जागृति’ के तत्वावधान में जिनवाणी पाठ प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें समाज के बच्चों ने जैन ग्रंथों से संबंधित दोहों और काव्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।




