रांची। पर्युषण महापर्व के सप्तम दिवस को ‘भक्ति दिवस’ के रूप में श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया गया। श्री साधुमार्गी जैन संघ, रांची द्वारा आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में श्रीमती ज्योति जी ओस्तवाल ने अंतःगढ़ सूत्र का वाचन किया। इसके पश्चात स्वाध्यायी श्रीमती पुष्पा जी ओस्तवाल ने अपने प्रेरक प्रवचन में तपस्या, त्याग, संयम और धार्मिक जीवन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि जीवन में छोटी से छोटी तपस्या और छोटे से छोटा त्याग भी अवश्य होना चाहिए। यदि कठोर तपस्या करना संभव न हो तो व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार छोटी तपस्या अवश्य करे। तपस्या से व्यक्ति का आत्मबल, शारीरिक बल और मनोबल तीनों मजबूत होते हैं। इसके विपरीत आलस्य और प्रमाद से भरा जीवन व्यक्ति की आंतरिक शक्ति को कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि तपस्या का मूल उद्देश्य आत्मिक उन्नति और कर्मों की निर्जरा है।
स्वाध्यायी जी ने रानी नंदा के पुत्र अभय कुमार की प्रेरक कथा सुनाते हुए उनकी अद्भुत बुद्धिमत्ता, दूरदर्शिता और चतुराई का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि अभय कुमार अपनी स्वाभाविक बुद्धिमत्ता और कुशाग्रता के बल पर किशोरावस्था में ही मगध राज्य के मुख्यमंत्री बन गए थे। उन्होंने राजा और आम नागरिकों, दोनों के हितों का समान रूप से ध्यान रखा। भगवान महावीर के परम भक्त एवं अनुयायी अभय कुमार कुशल प्रशासक होने के साथ-साथ प्रभावशाली कूटनीतिज्ञ भी थे। उनकी बुद्धि और निर्णय क्षमता का लोहा सभी मानते थे।
प्रवचन में जैन धर्म की अनेक गूढ़ बातों को सरल भाषा में समझाया गया। स्वाध्यायी जी ने श्रावक-श्राविकाओं के बारह व्रतों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन व्रतों का श्रद्धा और निष्ठा से पालन आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि तपश्चर्या से आत्मिक उन्नति होती है और उसके सकारात्मक प्रभाव जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी दिखाई देते हैं।
उन्होंने कहा कि जैन धर्म के चार प्रमुख स्तंभ साधु, साध्वी, श्रावक और श्राविका हैं। इन चारों में से किसी एक स्तंभ के कमजोर होने पर धर्म की मजबूती भी प्रभावित होती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भूमिका को समझते हुए धर्म, संयम और साधना के प्रति सजग रहना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में ‘रामामृतम’ ध्यान कराया गया। इसके पश्चात सामूहिक गुरु वंदना की गई तथा स्वाध्यायी जी द्वारा मांगलिक सुनाया गया।
कार्यक्रम का संचालन राजेश पींचा ने किया। पर्युषण महापर्व के दौरान समाज में अनेक तपस्याएं भी गतिमान हैं। विशाल दसानी, पायल कोठारी एवं पूजा बोहरा की तपस्या जारी है। इनके अलावा भी समाज के अनेक श्रावक-श्राविकाएं विभिन्न प्रकार की तप-साधना में संलग्न हैं। उपस्थित श्रद्धालुओं ने सभी तपस्वियों की तपस्या की अनुमोदना की।
इस अवसर पर मूलचंद सुराणा, जय जैन पींचा, राकेश बच्छावत, घेवरचंद जी नहाटा, सुमन बरमेचा, चेतन दास बोहरा सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।