जमशेदपुर : पश्चिमांचल ओडिशा का प्रमुख कृषि पर्व नुआखाई जमशेदपुर समेत पूरे कोल्हान क्षेत्र में पारंपरिक श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर मंगलवार को आयोजित इस पर्व को लेकर शहर के बाजारों में खासा उत्साह देखा गया। सोमवार को पर्व की पूर्व संध्या पर लोगों ने नए कपड़े, पूजा सामग्री और पकवानों की जमकर खरीदारी की। बिष्टुपुर, साकची, जुगसलाई, गोलमुरी और परसुडीह के प्रमुख बाजारों में ओडिया समुदाय के लोगों की भारी भीड़ रही। परिवारों ने नए धान यानी नवान्न को अर्पित करने के लिए मिट्टी के बर्तन, धूप-दीप और पारंपरिक वस्त्र खरीदे।
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नवान्न अर्पित करने के बाद साथ ग्रहण करेंगे भोजन
नुआ का अर्थ ‘नया’ और खाई का अर्थ ‘खाना’ होता है, यानी नए अन्न को ग्रहण करना। इसी परंपरा के तहत कल यानी मंगलवार सुबह नए अन्न को मां समलेश्वरी और कुलदेवियों को अर्पित किया जाएगा। पूजा-अर्चना संपन्न होने के बाद परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर नवान्न ग्रहण करेंगे। शहर के उलीडीह, बारीडीह, सोनारी, बागबेड़ा और परसुडीह जैसे ओडिया बहुल क्षेत्रों के अलावा आदित्यपुर, गम्हरिया और घाटशिला में भी पर्व को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। स्थानीय समितियों द्वारा धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए मंच व पंडाल सजकर तैयार हैं।
भेटघाट परंपरा में मिटेंगे गिले-शिकवे
नुआखाई में पूजा और प्रसाद ग्रहण करने के बाद ‘नुआंखाई भेटघाट’ की विशेष परंपरा निभाई जाएगी। मंगलवार दोपहर से शुरू होने वाली इस परंपरा के तहत छोटे अपने से बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेंगे। शाम के समय विभिन्न सामुदायिक भवनों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिनमें संबलपुरी लोकगीत, डालखाई और रसबती नृत्य की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। यह पर्व केवल नई फसल के स्वागत का प्रतीक नहीं है, बल्कि आपस में गिले-शिकवे मिटाकर रिश्तों को मजबूत करने का भी बड़ा अवसर है।




