पहले अपने चरित्र को ऊंचा उठा कर जिओ ताकि तुम्हारा जीवन धन्य हो जाये: मुनि श्री 108 सुयश सागर जी

झुमरीतिलैया-श्री दिगम्बर जैन मंदिर के सरस्वती भवन में चर्या शिरोमणि आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री108 सुयश सागर जी मुनीराज का भब्य मंगल चातुर्मास बहुत ही भक्ति भाव के साथ चल रहा है इसी कड़ी में मुनीराज के

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झुमरीतिलैया-श्री दिगम्बर जैन  मंदिर के सरस्वती भवन में चर्या शिरोमणि आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री108 सुयश सागर जी मुनीराज का भब्य मंगल चातुर्मास बहुत ही भक्ति भाव के साथ चल रहा है इसी कड़ी  में मुनीराज के मंगल आशीर्वाद से आज प्रातः बडे मंदिर में सभी प्रतिमा का मार्जन किया गया जो साल के  भादो महीना  में एक बार होता है।
जिसमे जितनी भी अष्ठधातुओर पाषाण की प्रतिमा होती है उनका मार्जन साल में एक बार होता है इसके पश्चात सभी प्रतिमा का अभिषेक एवं गुरु मुख से शांतिधारा समाज के अनेक भक्तों ने किया।इसके बाद धुलियान (पश्चिम बंगाल) से आये धुलियान जैन समाज के पदाधिकारी कैलाश जैन,दिलीप जैन के  अलावा कई अन्य  भक्ताें ने  मुनीराज के चरणों मे चातुर्मास के बाद पश्चिमबंगाल के आठ शहर में आने के लिए श्री फल चढ़ाया।
इसके पश्चात मुनि श्री में अपने मंगल प्रवचन में कहा कि कभी कभी वक्त के साथ, सब ठीक नहीं.. बल्कि सब खत्म हो जाता है । जीवन पल-पल मिट रहा है। आयु का तेल देह के दीये में जलकर धीरे- धीरे खत्म हो रहा है। अब तुम अपने जीवन के कल्याण, निर्माण ओर धर्म मार्ग के लिए, कोई ठोस साधना करो ताकि मृत्यु को सुखद, सार्थक और खुशनुमा बनाया जा सके।
देह में बैठे पंछी ने पंख फैला दिए हैं। प्राणों का पंछी उड़ान भरने की तैयारी कर रहा है। जल्द ही उड़ान भर लेगा और फिर तुम हाथ मलते रह जाओगे। प्राण पखेरू उड़े, उससे पहले अपने चरित्र को ऊंचा उठा लो, ताकि तुम्हारा जीवन धन्य धन्य हो जाए। अब तुम्हारे जीने की शैली कुछ इस प्रकार की हो जाए अपने मन को प्रभु के ऊपर में लगा कर जियो और अपनी नजरों को अपने चरणों में जमा कर जियो। हर पल अपने मन पर निगरानी रखो, कि कहीं सदाचरण से स्खलित ना हो जाए।
हर दिन को आखिरी दिन मान कर जियो। हर रात को अंतिम रात। हर अगला दिन पुनर्जन्म है।धार्मिक होने के लिए अंतिम दिन की प्रतीक्षा ना करें.. आज अभी इसी वक्त शुभ कार्य कर डालें…!आगे दसलक्षण महापर्व आ रहा है इस दसलक्षण पर्व पर एक संस्कार शिविर लग रहा है जिसमे सभी शामिल होकर अपने आप को धर्म मार्ग  पर लगा सकते होओर अपने जीवन को सार्थक बना सकते हो।समाज ओर विरागोदय वर्षायोग कमेटी के सदस्यों के द्वारा बाहर से आये सभी भक्तों को तिलक,माला, दुप्पटा पहनाकर स्वागत किया गया।संध्या में गुरु भक्ति के साथ णमोकार चालीसा का पाठ ,मंगल आरती किया गया।  यह जानकारी  कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार जैन ,नविन जैन ने दी।
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