श्रीकृष्ण कथा के दूसरे दिन आचार्य कुलदीप ने बताया भक्ति का महत्व

रांची : आर्य ज्ञान प्रचार समिति रांची द्वारा संचालित सीनियर सिटीजन होम की ओर से आयोजित संगीतमय श्रीकृष्ण कथा का दूसरा दिन मंगलवार को डीएवी नंदराज पब्लिक स्कूल, बरियातू रोड में आयोजित हुआ। कथा के दौरान प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य कुलदीप जी ने श्रीकृष्ण के जीवन

श्रीकृष्ण कथा

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रांची : आर्य ज्ञान प्रचार समिति रांची द्वारा संचालित सीनियर सिटीजन होम की ओर से आयोजित संगीतमय श्रीकृष्ण कथा का दूसरा दिन मंगलवार को डीएवी नंदराज पब्लिक स्कूल, बरियातू रोड में आयोजित हुआ। कथा के दौरान प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य कुलदीप जी ने श्रीकृष्ण के जीवन और उनके संघर्षों का उल्लेख करते हुए ईश्वर भक्ति और समर्पण का महत्व बताया। श्रीकृष्ण कथा का आयोजन 8 सितंबर से 12 सितंबर तक शाम 4 बजे से 7 बजे तक किया जा रहा है। वहीं 13 सितंबर को सुबह 9:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक कथा होगी।

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यज्ञ के बाद हुआ आचार्य का स्वागत

कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय की यज्ञशाला में यज्ञ के साथ हुई। कथावाचक आचार्य कुलदीप जी ने यज्ञ किया और यजमानों को आशीर्वाद प्रदान किया। इसके बाद आर्य ज्ञान प्रचार समिति रांची के प्रधान एसएल गुप्ता, आर्यसमाज रांची की संरक्षिका सुशीला गुप्ता, कोषाध्यक्ष संजय पोद्दार, आज के स्वागताध्यक्ष दिवाकर देव सहित अन्य लोगों ने पुष्पमालाओं से आचार्य कुलदीप का स्वागत किया। इसके बाद आचार्य जी के साथ उपस्थित अधिकारियों ने दीप प्रज्वलित किया।

कष्ट इंसान को बनाता है कुंदन

कथा के दौरान आचार्य कुलदीप ने द्वापर युग में श्रीकृष्ण की आवश्यकता को समझाते हुए उनके माता-पिता के संघर्ष का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कल्पना कीजिए कि कोई व्यक्ति विवाह करके वापस लौटने की तैयारी कर रहा हो और उसी समय उसे कैद कर कारागार में डाल दिया जाए, तो उसकी मन:स्थिति कैसी होगी। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण के माता-पिता ने जितना कष्ट सहा, उतना कष्ट आज के जीवन में सामान्य तौर पर नहीं है। स्वयं श्रीकृष्ण ने भी अनेक कष्ट और समस्याएं झेलीं, फिर भी आज छोटी-छोटी परेशानियों में लोग विचलित हो जाते हैं।

आचार्य कुलदीप ने कहा कि कष्टों को दूर करने का एक उपाय ईश्वर भक्ति और समर्पण है। ईश्वर भक्ति ऐसी दवा है, जो जीवन में हमेशा साथ रहती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह सोना तपकर कुंदन बनता है, उसी तरह कष्ट इंसान को निखारते हैं, जबकि अत्यधिक सुख विनाश का कारण बन सकता है। उन्होंने लोगों से कहा कि यह तय करना उनके हाथ में है कि उन्हें कुंदन बनना है या लोहा। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ और प्रसाद वितरण के साथ शाम सात बजे हुआ।

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