रांची। झारखंड के खनिज संसाधनों, आदिवासी अधिकारों और राज्य के राजस्व को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रांची स्थित कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री सुबोधकांत सहाय ने खनिज संशोधन कानून को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए।सुबोधकांत सहाय ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और राज्य को खनिज तथा रॉयल्टी से करीब 14 हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार की नजर इस राजस्व पर क्यों है और यदि राज्य के अधिकारों या राजस्व व्यवस्था में बदलाव होता है तो झारखंड को होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई कैसे की जाएगी।उन्होंने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा और जमीन राज्य में है, लेकिन महत्वपूर्ण फैसले दिल्ली से लिए जा रहे हैं।
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सहाय ने वर्ष 2024 में राज्यों के अधिकारों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यों के अधिकारों के सवाल पर न्यायालय का रुख महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपने संसदीय बहुमत के आधार पर राज्यों से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करा रही है।कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि वर्ष 2026-27 के बजट में सामाजिक और विकास योजनाओं के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था किस प्रकार की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि झारखंड के खनिज राजस्व में किसी प्रकार की कमी आती है तो इसका सीधा असर राज्य की विकास योजनाओं और जनता पर पड़ सकता है।
सहाय ने वर्ष 2024 में राज्यों के अधिकारों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यों के अधिकारों के सवाल पर न्यायालय का रुख महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपने संसदीय बहुमत के आधार पर राज्यों से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करा रही है।कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि वर्ष 2026-27 के बजट में सामाजिक और विकास योजनाओं के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था किस प्रकार की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि झारखंड के खनिज राजस्व में किसी प्रकार की कमी आती है तो इसका सीधा असर राज्य की विकास योजनाओं और जनता पर पड़ सकता है।
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प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुबोधकांत सहाय ने आदिवासी अधिकारों, विस्थापन और पेसा कानून के प्रावधानों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों के गांवों में आदिवासी समाज को विशेष अधिकार प्राप्त हैं। ऐसे में नए कानून का ग्राम स्तर के अधिकारों, आदिवासी हितों और संघीय व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए।
उन्होंने झारखंड को केंद्र से मिलने वाली बकाया राशि का मुद्दा भी उठाया और आरोप लगाया कि राज्य देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है, लेकिन उसके बकाये का भुगतान नहीं किया जा रहा है। सहाय ने कहा कि खनिज, जमीन अधिग्रहण और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर यदि फैसले केंद्र सरकार के स्तर से ही लिए जाते रहे तो राज्यों की चुनी हुई सरकारों की भूमिका सीमित हो सकती है।कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर चरणबद्ध आंदोलन का भी ऐलान किया है।
पार्टी के अनुसार 27 अगस्त को जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन, 7 सितंबर को राजभवन घेराव और 9 से 15 सितंबर तक विभिन्न स्तरों पर विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।सुबोधकांत सहाय ने कहा कि यह संघर्ष किसी एक सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड के अधिकार, प्राकृतिक संसाधनों, आदिवासी हितों और राज्य की जनता के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।




