रांची: सराफ परिवार के तत्वावधान में महाराजा अग्रसेन भवन, रांची में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत गीता कथा अमृत महोत्सव के तृतीय दिवस का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में हुआ। जगन्नाथधाम के सुप्रसिद्ध कथावाचक एवं व्यास महाराज दिनेश जी भारद्वाज ने व्यास पीठ से श्रीमद्भागवत के विविध प्रेरणादायी प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भगवान के जयकारे लगाते रहे।
कथावाचक दिनेश जी भारद्वाज ने श्रीमद्भागवत के प्रसंगों को क्रमवार प्रस्तुत करते हुए सृष्टि के विस्तार एवं कपिलोख्यान का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान की सृष्टि व्यवस्था में प्रत्येक जीव की अपनी भूमिका है और मनुष्य को अपने जीवन का उद्देश्य समझकर धर्म, सदाचार एवं ईश्वर भक्ति के मार्ग पर चलना चाहिए। कपिल मुनि के उपदेशों के माध्यम से ज्ञान, वैराग्य और भक्ति के महत्व को समझाया गया।इसके बाद सती-शिव चरित्र का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया।
भगवान शिव और माता सती के प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा, पारिवारिक मर्यादा, आत्मसम्मान तथा धर्म के प्रति समर्पण का संदेश दिया गया। कथा के प्रसंगों का सजीव चित्रण प्रस्तुत किए जाने से पूरा वातावरण भावनात्मक एवं आध्यात्मिक हो उठा।कथा व्यास ने बालक ध्रुव जी के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि दृढ़ संकल्प, तपस्या और भगवान के प्रति अटूट विश्वास से असंभव कार्य भी संभव हो सकता है। बालक ध्रुव ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य से विचलित हुए बिना भगवान नारायण की आराधना की और परम पद प्राप्त किया। ध्रुव चरित्र बच्चों और युवाओं को विशेष रूप से लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है।
गणेश चतुर्थी के अवसर पर कथा में भगवान श्रीगणेश की महिमा का भी विस्तार से वर्णन किया गया। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य एवं विघ्नहर्ता बताते हुए उनके स्वरूप, महिमा और पूजन के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला गया। गणेश जी सहित कथा के विभिन्न प्रसंगों की मनोहारी सजीव झांकियां प्रस्तुत की गईं, जिन्हें देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। कथा स्थल को भव्य एवं अलौकिक रूप से सजाया गया था। सुमधुर भजनों और संकीर्तन से पूरा महाराजा अग्रसेन भवन भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु भक्ति में झूमते हुए भगवान के जयकारे लगाते रहे। कथा के समापन पर सामूहिक आरती की गई तथा सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण हुआ।
इस अवसर पर दयानंद सर्राफ, सीताराम सर्राफ, गोपाल सर्राफ, ओम सर्राफ, गिरधारी सर्राफ, पवन सर्राफ, भगवान सर्राफ, रामस्वरूप सर्राफ, प्रदीप सर्राफ, निर्मल मानपुरिया, अनुप सर्राफ, संजय सर्राफ, दिलीप सर्राफ, विजय सर्राफ, संदीप सर्राफ, मोनू सर्राफ, विक्रांत सर्राफ, मुकेश काबरा, विनोद महलका, प्रेम अग्रवाल गौरीशंकर अग्रवाल, राजेंद्र अग्रवाल, विष्णु सोनी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।




