रांची : झारखंड में संगठित अपराध की दुनिया में अब राहुल सिंह और राहुल दुबे के नाम तेजी से चर्चा में आ रहे हैं। एक समय अमन साहू, अमन सिंह और सुजीत सिन्हा जैसे अपराधियों के नाम से राज्य में दहशत का माहौल था। इनके मारे जाने के बाद लग रहा था कि आपराधिक गिरोहों का नेटवर्क कमजोर पड़ जाएगा। लेकिन अब ‘दो आर’ यानी राहुल सिंह और राहुल दुबे के गिरोह पुलिस के लिए नई मुसीबत बनते जा रहे हैं।
Read More : टाटा स्टील की खेल पहल से चमकीं झारखंड की प्रतिभाएं, जानें उपलब्धियां
पुलिस की कार्रवाई जारी, फिर भी अंकुश नहीं
पुलिस दोनों गिरोहों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार छापेमारी और गिरफ्तारियां कर रही है। कार्रवाई के दौरान इनके कई गुर्गे गिरफ्तार किए गए हैं। मुठभेड़ में दोनों गिरोहों से जुड़े अपराधियों को गोली भी लगी है। इसके बावजूद इनकी गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है। इन गिरोहों का तरीका केवल वारदात को अंजाम देने तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया के जरिए दहशत फैलाने की रणनीति भी अपनाई जा रही है।
पहले वारदात, फिर सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी
इन गिरोहों का एक पैटर्न सामने आया है। पहले किसी कारोबारी, ठेकेदार या संस्थान को निशाना बनाया जाता है और फिर सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर घटना की जिम्मेदारी ली जाती है। धमकी भरे संदेशों और जिम्मेदारी लेने वाले पोस्ट के जरिए अपराधी अपनी मौजूदगी और प्रभाव दिखाने की कोशिश करते हैं। इसका मकसद रंगदारी वसूलने के साथ कारोबारियों और आम लोगों में भय पैदा करना भी है। हाल के दिनों में राहुल दुबे गैंग की ओर से सीसीएल के सीएमडी को धमकी दिए जाने का मामला सामने आया। इससे इन गिरोहों का दुस्साहस बड़े सरकारी संस्थानों के शीर्ष अधिकारियों तक पहुंचने की बात सामने आई है। ऐसे में पुलिस के सामने अपराधियों की गिरफ्तारी के साथ उनके आर्थिक नेटवर्क, सोशल मीडिया गतिविधियों और संरक्षण तंत्र को ध्वस्त करने की चुनौती है।
दोनों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी
झारखंड पुलिस मुख्यालय ने दोनों गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने की रणनीति बनाई है। आईजी अभियान सह पुलिस प्रवक्ता नरेंद्र सिंह के अनुसार, राहुल सिंह और राहुल दुबे के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जा चुका है। दोनों अपराधी फिलहाल विदेश में रहकर झारखंड में अपना आपराधिक नेटवर्क संचालित कर रहे हैं। इनके इशारे पर स्थानीय गुर्गे कारोबारियों, ठेकेदारों और निर्माण कंपनियों को निशाना बनाते हैं। रंगदारी मांगने, धमकी देने और रकम नहीं मिलने पर फायरिंग कर दहशत फैलाने जैसी घटनाओं में इनके गिरोह की संलिप्तता सामने आती रही है। विदेश में बैठकर अपराध संचालित करने के कारण पुलिस के लिए इन तक सीधे पहुंचना चुनौती बना हुआ था। रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद अब इनकी तलाश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की जा सकेगी।
राहुल सिंह के गिरोह का कई जिलों में नेटवर्क
राहुल सिंह पहले कुख्यात अपराधी अमन साहू के गिरोह से जुड़ा था। मार्च 2025 में पुलिस मुठभेड़ में अमन साहू के मारे जाने के बाद राहुल सिंह ने गिरोह की कमान संभालने का दावा किया था। इसके बाद उसके गुर्गों ने झारखंड के कोयला और औद्योगिक क्षेत्रों में रंगदारी वसूली का नेटवर्क सक्रिय किया। रांची, रामगढ़, पलामू, बोकारो, चतरा, हजारीबाग और लातेहार में उसके गिरोह की गतिविधियां सामने आती रही हैं। कारोबारियों और ठेकेदारों को धमकी देने से लेकर निर्माण साइटों पर फायरिंग तक की घटनाओं में उसके गिरोह का नाम आया है।
राहुल दुबे का गिरोह भी लगातार दे रहा चुनौती
दूसरी ओर, राहुल दुबे का गिरोह भी झारखंड पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। गिरोह के सदस्य रंगदारी के लिए कारोबारियों और ठेकेदारों को निशाना बना रहे हैं। हाल के दिनों में हजारीबाग और रांची में हुई फायरिंग की घटनाओं में राहुल दुबे के गिरोह का नाम सामने आया है। 29 अक्टूबर की रात हजारीबाग के मटवारी स्थित एके इंटरनेशनल होटल पर अपराधियों ने गोलीबारी की थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर राहुल दुबे के नाम से घटना की जिम्मेदारी लेने और होटल संचालक को धमकी देने वाली पोस्ट सामने आई। 30 अक्टूबर को रांची पुलिस ने एनकाउंटर के बाद इस गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया। इसके बाद हथियार सप्लायर जियाउल हबीब को भी गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार गुर्गों को सजा दिलाने पर जोर
आईजी नरेंद्र सिंह ने कहा कि दोनों गिरोहों से जुड़े अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। मुठभेड़ की घटनाओं में पुलिस ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया जाएगा कि ऐसे मामलों को चिह्नित कर स्पीडी ट्रायल कराया जाए, ताकि अपराधियों को जल्द सजा मिल सके और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
धमकी मिलने पर पुलिस को गोपनीय जानकारी दें
आईजी अभियान ने इन गिरोहों से धमकी मिलने वाले लोगों से भी अपील की है। उन्होंने कहा कि कारोबारी, ठेकेदार या अन्य प्रभावित लोग गोपनीय तरीके से पुलिस को इसकी जानकारी दें। पुलिस उनकी शिकायतों पर कार्रवाई करेगी और सुरक्षा के जरूरी कदम उठाएगी।
नेटवर्क खत्म करना पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती
संगठित अपराध के खिलाफ लड़ाई केवल बड़े अपराधियों की गिरफ्तारी या एनकाउंटर तक सीमित नहीं हो सकती। गिरोह का सरगना जेल में हो या राज्य से बाहर, नेटवर्क सक्रिय रहने पर अपराध की घटनाएं जारी रह सकती हैं। रंगदारी वसूलने वाले गुर्गे, धमकी, हथियारों की उपलब्धता और सोशल मीडिया के जरिए गिरोह की ब्रांडिंग इस नेटवर्क को मजबूती देते हैं। ऐसे में झारखंड पुलिस के सामने ‘दो आर’ यानी राहुल सिंह और राहुल दुबे के पूरे नेटवर्क को तोड़ने की चुनौती है। सवाल यह भी है कि अमन साहू, अमन सिंह और सुजीत सिन्हा जैसे अपराधियों के दौर के बाद क्या झारखंड में संगठित अपराध नए चेहरों के साथ फिर जड़ें मजबूत कर रहा है? पुलिस की लगातार कार्रवाई के बीच आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ‘दो आर’ की दहशत पर कानून कितना प्रभावी अंकुश लगा पाता है।



