जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली में दो दिवसीय संस्कृत काव्य पाठ प्रतियोगिता संपन्न : आधुनिक युग में संस्कृत वाचन कला और काव्यों की महत्ता पर दिया जोर

रांची। जवाहर विद्यालय में संस्कृत का अध्ययन विद्यार्थियों को “ग्लोबल” बनने के साथ-साथ अपनी “लोकल” संस्कृति और जड़ों से जोड़े रखता है। यह एक ऐसी भाषा है जो छात्र का ‘साक्षर’ होने के साथ-साथ ‘संस्कारी’ होना भी सुनिश्चित करती है। इसके वाचन से उच्चारण की

रांची। जवाहर विद्यालय में संस्कृत का अध्ययन विद्यार्थियों को “ग्लोबल” बनने के साथ-साथ अपनी “लोकल” संस्कृति और जड़ों से जोड़े रखता है। यह एक ऐसी भाषा है जो छात्र का ‘साक्षर’ होने के साथ-साथ ‘संस्कारी’ होना भी सुनिश्चित करती है। इसके वाचन से उच्चारण की शुद्धता, एकाग्रता और मानसिक शांति मिलती है। इसी उद्देश्य को समर्पित जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली के दयानंद प्रेक्षागृह में दो दिवसीय संस्कृत काव्य पाठ प्रतियोगिता का शानदार आयोजन किया गया।

दो दिवसीय आयोजित इस प्रतियोगिता में विद्यालय के कक्षा 6 से 10वीं तक के छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।
प्रतियोगिता के दोनों दिन सब-जूनियर (कक्षा 6 से 8) और जूनियर (कक्षा 9 एवं 10) ग्रुप के छात्र-छात्राओं ने महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र, शिव तांडव स्तोत्र, लिंगाष्टकम, जगन्नाथ स्तोत्र, श्री हरि स्तोत्र, श्री राम स्तुति, भारत देश वंदना, मातृभूमि वंदना, मधुराष्टकम्, गीत गोविंद, लक्ष्मी स्तोत्र, कृष्ण स्तोत्र और गणेश स्तोत्र जैसे विविध काव्यों, ऋचाओं और श्लोकों का सुमधुर व लयबद्ध गायन किया। विद्यार्थियों के इस सस्वर पाठ से पूरा प्रेक्षागृह गुंजायमान और भक्तिमय हो उठा।

​प्रतियोगिता के जूनियर ग्रुप (कक्षा 9वीं एवं 10वीं) में ध्रुव नंदन झा (कक्षा 10 ‘A’, दयानंद हाउस) ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। वहीं वेदांत* (कक्षा 10 ‘B’, तिलक हाउस) एवं *कुमारी नंदिनी (कक्षा 10 ‘B’, राजेंद्र हाउस) को द्वितीय पुरस्कार तथा नितिन सौरभ (कक्षा 10 ‘B’, राजेंद्र हाउस) एवं सृष्टि प्रिया (कक्षा 9वीं, तिलक हाउस) को *तृतीय पुरस्कार मिला।

सब-जूनियर ग्रुप (कक्षा 6 ठी से 8 वीं) में आज अपनी अद्भुत वाचन कला के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते हुए अनुष्का मिश्रा (कक्षा 8 ‘C’) ने *प्रथम स्थान हासिल किया। नंदिनी सिन्हा* (कक्षा 6 ‘B’, टैगोर सदन) एवं अद्यानशा पलक (कक्षा 7 ‘G’, तिलक सदन) द्वितीय स्थान पर रहीं, जबकि प्रतीक कुमार (कक्षा 8 ‘C’, टैगोर सदन) एवं रुद्र प्रताप पाठक (कक्षा 8 ‘D’, दयानंद सदन) ने संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त किया।

​इस दो दिवसीय प्रतियोगिता में निष्पक्ष न्यायकर्ता और निर्णायक की भूमिका विद्यालय के वरिष्ठ संस्कृत शिक्षक अमरेंद्र पाठक एवं अखिलेन्द्र झा ने निभाई। उन्होंने बच्चों के शुद्ध उच्चारण, लय, ताल, कंठस्थीकरण और प्रस्तुतीकरण के कड़े मानकों के आधार पर विजेताओं का चयन किया और उनका मार्गदर्शन किया।

​कार्यक्रम के समापन और पुरस्कार वितरण के अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य बी. एन. झा ने सभी प्रतिभागी छात्रों की सराहना करते हुए कहा कि संस्कृत हमारी संस्कृति की आत्मा है। इस प्रकार की प्रतियोगिताओं से छात्रों में न केवल भाषा के प्रति प्रेम जागृत होता है, बल्कि संस्कृत काव्यों के वाचन से उनका बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास भी होता है। आज के वैज्ञानिक युग में भी संस्कृत की वाचन कला का विशेष महत्व है, क्योंकि इसका वैज्ञानिक उच्चारण याददाश्त और एकाग्रता को बढ़ाता है। यह भाषा हमें अपनी जड़ों से जोड़कर एक बेहतर नागरिक बनाती है। श्रोताओं और अभिभावकों ने विद्यालय के इस अनूठे प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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