आदिवासियों के पृथक धर्मकोड को लेकर सक्रिय हुए आदिवासी संगठन, लक्ष्य निर्धारित

धर्मगुरु बंधन तिग्गा की अगुवाई में राष्ट्रव्यापी अभियान, अबकी जनगणना दो करोड़ सरना रांची। आदिवासियों के पृथक धर्मकोड को लेकर फिर से माहौल बनना शुरू हो गया है। इस बार धर्मकोड के आंदोलन की अगुवाई झारखंड से ही राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है। जिसकी

धर्मगुरु बंधन तिग्गा की अगुवाई में राष्ट्रव्यापी अभियान, अबकी जनगणना दो करोड़ सरना

रांची। आदिवासियों के पृथक धर्मकोड को लेकर फिर से माहौल बनना शुरू हो गया है। इस बार धर्मकोड के आंदोलन की अगुवाई झारखंड से ही राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है। जिसकी गूंज इस बार कई आदिवासी बहुल राज्यों सहित दिल्ली में सुनने को मिलेगी। जिसकी रणनीति बनकर तैयार हो गई है। राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय समिति के संयोजक सह पूर्वमंत्री देवकुमार धान ने कहा कि अब की जनगणना पांच करोड़ आदिवासी धर्म के नारे के साथ राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया जा रहा है।

इसकेा लेकर 26 जुलाई को असम में सम्मेलन होगा। इसके बाद 28 जुलाई को पश्चिम बंगाल और नौ अगस्त को रायपुर, 29-30 अगस्त को नई दिल्ली में और 27 सितंबर को रांची में आदिवासी धर्मकोड की मांग को लेकर वृहद कार्यक्रम की रणनीति बनाई गई है। वहीं, राजी पड़हा प्रार्थना सभा से जुड़े सरना धर्मगुरु बंधन तिग्गा भी सरना धर्मकोड जनगणना कॉलम में लिखने को लेकर पूरे देश स्तर पर अभियान चला रहे है।

जिसमें वे अबकी जनगणना दो करोड़ सरना के स्लोगन के साथ जनसंपर्क चल रही है। उन्होंने बताया कि सरना धर्म कोड को लेकर 15 अगस्त या 15 नवंबर को दिल्ली में कार्यक्रम होगा । त्रिपुरा में नौ अगस्त के कार्यक्रम में धर्मगुरु शामिल होंगे। इससे पहले सरना धर्म कोड लिखने को लेकर असम, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ में सम्मेलन हो चुके हैं।

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