राँची: सावन मास के पावन महीने में सोमवारी का काफी महत्व होता है. सोमवार को काफी संख्या में श्रद्धालु विभिन्न शिवालयों में उमड़ते हैं, राजधानी में पहाड़ी मंदिर राज्य भर के शिवालयों में अपना अलग पहचान रखता है. राज्य के विभिन्न जिला लोग यहां पूजा अर्चना करने पहुंचते हैं. इसके लिए मंदिर में पहाड़ी मंदिर न्यास समिति की ओर से भी श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते खासे इंतजाम किये जाते हैं. रांची पुलिस द्वारा सुरक्षा व ट्रैफिक व्यवस्था भी सुदृढ़ की जाती है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार का कष्ट न हो. सुरक्षा में काफी संख्या में महिला व पुरुष पुलिसकर्मियों को लगाया जाता है. ट्रैफिक में भी बदलाव किया जाता है.
अपर बाजार के शनि मंदिर की तरफ से बानो मंजिल रोड होते पहाड़ी मंदिर जाने वाले रास्ते को वाहनेां के लिए नो इंट्री कर दिया जाता है. उसके अलावा रातू रोड दुर्गा मंदिर के सामने से भी वाहनों की नो इंट्री रहता है. रातू रोड में दिन में छोटे मालवाहक वाहनपर रोक लगा दी जाती है, ताकि श्रद्धालुओं किसी प्रकार का कष्ट न हो. पहाड़ी मंदिर सोमवार की अहले सुबह 3-4 बजे से श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो जाता है.
स्वर्ण रेखा से जल उठाकर पैदल ही पहाड़ी मंदिर आते हैं श्रद्धालुओं
श्रद्धा और भक्ति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हजारों महिला-पुरुष नामकुम के समीप से स्वर्णरेखा नदी में स्नान करने के बाद जल लेकर पैदल ही पहाड़ी मंदिर पहुंचते हैं. इस दौरान पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है. बोल-बम, बोल बम का नारा है, बाबा एक सहारा आदि के कई तरह का जयघोष करते हुए पहाड़ी मंदिर पहुंचते और वहां जल अर्पण करने के बाद ही जल या अन्न ग्रहण करते हैं. रविवार की रात कई संस्थाएं श्रद्धालुओं के सेवा के लिए शिविर भी लगाते हैं.
also read :लोक भवन में राज्यपाल के ‘एट होम’ कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन







