रांची: झारखंड की सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा कुत्तों तथा खुले में घूमने वाले मवेशियों की बढ़ती समस्या को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। आम लोगों की सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मामले में अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य और केंद्र सरकार को जल्द से जल्द अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने अदालत में अपनी रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में करीब 3,500 किलोमीटर लंबे राजमार्गों की सुरक्षा को लेकर कई कदम उठाए गए हैं। इसके तहत 34 संवेदनशील स्थानों की पहचान की गई है और लगभग 325 किलोमीटर सड़क पर फेंसिंग कराई गई है। इसके अलावा अवैध कट बंद करने के साथ 24 घंटे पेट्रोलिंग वाहनों की तैनाती का भी दावा किया गया है।
हालांकि, एनएचएआई ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि राज्य सरकार से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के कारण कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव और समन्वय से जुड़े मामले अब भी लंबित हैं।
वहीं, राज्य के 24 जिलों में से फिलहाल केवल सात जिलों में ही एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) केंद्र संचालित हैं। सरकार की ओर से बताया गया कि पिछले छह महीनों में 14 हजार से अधिक आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण कराया गया है। इसके साथ ही शहरी वार्डों में कुत्तों के लिए फीडिंग जोन चिह्नित करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
इसके बावजूद सड़कों पर आवारा पशुओं और कुत्तों की समस्या पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी है। हाईकोर्ट ने इस मामले में संबंधित विभागों से गंभीरता दिखाते हुए आवश्यक कार्रवाई करने की अपेक्षा की है।
मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को निर्धारित की गई है।


